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राजस्थान

महिला और बाल हितैषी पंचायतों के लिए सरपंच-साथिन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

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HIGHLIGHTS

  1. 1 चायती राज आयुक्त एवं शासन सचिव रवि जैन ने प्रशिक्षण कार्यशाला की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरपंच और साथिन मिलकर काम करें जिससे ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके
organization of sarpanch sathin training workshop for women and child friendly panchayats

जयपुर । महिला अधिकारिता निदेशालय एवं पंचायती राज विभाग द्वारा मंजरी संस्थान की भागीदारी में यूनीसेफ राजस्थान के तकनीकी व वित्तीय सहयोग से 'पंचायत संग साथिन' (राष्ट्रीय ग्राम स्वराज) अभियान के अंतर्गत सरपंच एवं साथिनों के लिए बाल एवं महिला हितैषी पंचायत विषय पर 22 और 23 अगस्त 2024 को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सत्रों में चर्चा की जाएगी।

पंचायती राज आयुक्त एवं शासन सचिव रवि जैन ने प्रशिक्षण कार्यशाला की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरपंच और साथिन मिलकर काम करें जिससे ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा उनके सम्पूर्ण विकास के लिए साथिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत आवश्यक है कि साथिनों को ग्राम पंचायतों में बैठने का स्थान मिले।

इसके लिए पंचायती राज विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों को जल्दी ही आदेश जारी कर पाबंद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला उत्थान में साथिनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पंचायती राज विभाग और महिला बाल विकास विभाग द्वारा साथिनों के कैडर को मजबूत करने के लिए काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि साथिन हर महीने  आयोजित होने वाली महिला शक्ति समूहों की बैठक आयोजित करें और इसकी रिपोर्ट भी नियमित रूप से भिजवाएं।

महिला एवं बाल विकास विभाग के शासन सचिव डॉ. मोहनलाल यादव ने प्रतिभागियों की प्रशिक्षण के संदर्भ में अपेक्षाओं के बारे में बताते हुए कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर महिला विकास के कार्यों में साथिनों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। उन्होंने कहा कि साथिनों को अपनी वर्तमान और प्रस्तावित भूमिकाओं के प्रभावी निर्वहन में सक्षम बनाने के लिए पूर्व निर्धारित अंतराल पर आधारभूत और अतिरिक्त प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता बनी रहती है। साथिनों के प्रशिक्षण के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मॉड्यूल तैयार कर लिया गया है।

अगले माह से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि साथिन महिला जागरूकता तथा कुप्रथाओं के उन्मूलन का काम करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देवें। उन्होंने कहा कि सरपंचों द्वारा साथिनों के सहयोग से ही ग्राम पंचायतों की महिलाओं के समग्र विकास के कार्य प्रभावी रूप से साकार होते हैं।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की गलियों—चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने का कार्य किया जाए। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सब की प्राथमिकता है। हमने एक अप्रैल 2024 से साथिनों का मानदेय 10 प्रतिशत बढ़ाया है। आगे भी चरणबद्ध रूप से मानदेय में बढ़ोतरी की जाएगी।

यूनिसेफ राजस्थान सामाजिक नीति विशेषज्ञ शफकत हुसैन ने अपने सम्बोधन में कहा कि सतत विकास के 17 वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है कि समाज में कोई भी पीछे न छूटे। इसके लिए महिलाओं और बच्चों को साथ लेकर ही इस उद्देश्य को प्राप्त किया जा सकता है।

आयुक्त एवं शासन सचिव, पंचायती राज, रवि जैन तथा महिला एवं बाल विकास शासन सचिव डॉ. मोहन लाल यादव ने महिलाओं और बच्चों से सम्बंधित 'सतत् विकास लक्ष्यों क़ी प्राप्ति में साथिनों की संभावित भूमिका' पुस्तिका का विमोचन किया।

दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला में उपनिदेशक जिला आयोजना, पंचायती राज विभाग गुरुदर्शन सिंह रमाणा, साथिन और सरपंच उपस्थित रहे।

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