सिरोही | राजस्थान उच्च न्यायालय की दोहरी पीठ की ओर से सरूपगंज की एक विधवा की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किए गए आदेशों की एक पखवाडे बाद भी पालना नहीं हो रही है। इधर, विधवा पंचायत समिति की ओर से आवंटित दुकान का न्यायालय की ओर से निर्धारित किए गए बकाया किराये को जमा करवा दिए जाने के बाद भी कब्जा लेने के लिए न्यायालय के आदेश लिए अधिकारियों की चौखट दर चौखट घुम रही है, मगर अधिकारी है कि राजनीतिक दबाव के चलते जानबुझ कर हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना कर रहे है।
दरअसल, सरूपगंज की एक विधवा श्रीमती सीमा डी पटेल का वर्ष 2011 में पंचायत समिति की ओर से अपनी और अपने बच्चों की आजीविका चलाने के लिए सरूपगंज में पंचायत समिति की भूमि पर दुकान का आवंटन किया था।
जहां वह मसाले का व्यापार कर अपना भरण पोषण कर रही थी। इसी दौरान विगत दस माह पूर्व अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारियों ने उसे दुकान से बेदखल करने के लिए यह बताते हुए बेदखली का नोटिस दिया कि दुकान जीर्णशीर्ण अवस्था में है और उसकी मरम्मत की आवश्यकता है।
विधवा का यह आरोप है कि अधिकारियों ने जिस समय निरीक्षण किया उसे समय वह मौके पर भी मौजूद नहीं थी। बावजूद इसके उसकी दुकान जिसमें मसाले और गेहुं भरे हुए थे को सीज कर दिया गया। अपनी आजीविका पर मंडराते संकट को देखते हुए विधवा जो कि स्वयं सत्तारूढ पार्टी की कार्यकर्ता है वह गुहार लेकर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की चौखट तक पहुंची मगर उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
आखिरकार थकहार कर वह राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण में पहुंची। राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ में सुनवाई के बाद हुए फैसले से वह संतुष्ट नहीं हुई तो वह अपना हक पाने के लिए उसने डबल बैंच में अपील दायर की। विधवा की इस अपील को न्यायाधीपति मुन्नूरी लक्ष्मण व मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।