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राजस्थान

दो माह में स्थापित हुए 42 मेगावाट के सोलर प्लांट

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HIGHLIGHTS

  1. 1 कंपोनेंट-सी के अन्तर्गत जयपुर डिस्कॉम में अब तक 52.63 मेगावाट क्षमता के कुल 20 सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं। जिनसे 5575 किसानों को खेती के लिए दिन में बिजली उपलब्ध हो रही है। वहीं अजमेर एवं जोधपुर डिस्कॉम को मिलाकर तीनों डिस्कॉम मेें 80.89 मेगावाट क्षमता के कुल 31 प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। जिनसे 7813 किसानों का खेती के लिए दिन में बिजली का सपना साकार हुआ है
pm kusum yojana gets new momentum

जयपुर। राज्य में पीएम कुसुम योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति मिल रही है। योजना के कंपोंनेंट-सी के अन्तर्गत गुरूवार को बहरोड़-कोटपूतली जिले के बानसूर सब डिवीजन क्षेत्र में एक साथ दो सोलर प्लांट स्थापित किए गए। कुल 5.26 मेगावाट क्षमता के इन दोनों प्लांटों से बालावास तथा भूपसेड़ा ग्रिड सब स्टेशन से जुड़े 547 किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली सुलभ हो सकेगी।

उल्लेखनीय है कि बीते करीब दो माह में जयपुर विद्युत वितरण निगम में कुसुम योजना के कंपोनेंट-सी के अन्तर्गत कुल 42 मेगावाट क्षमता के 15 प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें कोटपूतली सर्किल में सर्वाधिक 7, भिवाड़ी वृत्त में 5 तथा जयपुर जिला उत्तर, जयपुर जिला दक्षिण एवं झालावाड़ वृत्त क्षेत्र में एक-एक सौर ऊर्जा संयंत्रों से बिजली उत्पादन प्रारंभ किया गया है। 

कंपोनेंट-सी के अन्तर्गत जयपुर डिस्कॉम में अब तक 52.63 मेगावाट क्षमता के कुल 20 सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं। जिनसे 5575 किसानों को खेती के लिए दिन में बिजली उपलब्ध हो रही है। वहीं अजमेर एवं जोधपुर डिस्कॉम को मिलाकर तीनों डिस्कॉम मेें 80.89 मेगावाट क्षमता के कुल 31 प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। जिनसे 7813 किसानों का खेती के लिए दिन में बिजली का सपना साकार हुआ है।

उल्लेखनीय है कि योजना में अवार्ड जारी करने के बाद पावर परचेज एग्रीमेंट फाइनल करने, ट्रांसमिशन लाइन तथा मीटर लगाने सहित अन्य आवश्यक स्वीकृतियों के काम निर्धारित समयावधि में किए जा रहे हैं। 
 
कुसुम योजना को गति देने के लिए करीब डेढ़ माह पूर्व मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने की पहल की गई है। इसके तहत कंपोनेंट ए एवं सी के तहत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए डिस्कॉम स्तर पर आवेदनों का सुव्यवस्थित एवं त्वरित निस्तारण किया जा रहा है।

सोलर पावर प्लांट से उत्पन्न होने वाली सौर बिजली की निकासी के लिए 11 केवी एवं 33 केवी लाइन के अनुमोदन, प्लांट के लिए प्रस्तावित भूमि से एलटी, 11 केवी एवं 33 केवी लाइनों को जोड़ने आदि प्रक्रियाओं के लिए विभिन्न स्तरों पर स्वीकृति प्रदान करने के लिए अभियंताओं के स्तर पर समय सीमा का निर्धारण किया गया है। इस एसओपी के माध्यम से सोलर संयंत्रों को स्थापित करने की राह आसान हो रही है। साथ ही सोलर पावर जेनरेटर्स की समस्याओं को भी दूर किया गया है।

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