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राजस्थान

सिवाना में मिला रेयर अर्थ का दुनिया का सबसे बड़ा खजाना

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राजस्थान (Rajasthan) के बाड़मेर (Barmer) जिले में स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स (Siwana Ring Complex) को खास गुणवत्ता वाले रेयर अर्थ मैटेरियल (Rare Earth Materials) के कारण दुनिया के सबसे समृद्ध खजानों में से एक बताया जा रहा है। यहां इलेक्ट्रिक कार, मोबाइल और रॉकेट से लेकर न्यूक्लियर पावर तक के लिए कच्चा माल मौजूद है, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

HIGHLIGHTS

  1. 1 राजस्थान के सिवाना में मिला रेयर अर्थ मैटेरियल का विशाल भंडार। इन चट्टानों में इलेक्ट्रिक कार, मोबाइल और रॉकेट से लेकर न्यूक्लियर पावर तक का कच्चा माल मौजूद। सिवाना में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का घनत्व औसत से करीब 100 गुना अधिक पाया गया। यह खोज भारत को रेयर अर्थ तत्त्वों में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी।
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जयपुर: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स को खास गुणवत्ता वाले रेयर अर्थ मैटेरियल के कारण दुनिया के सबसे समृद्ध खजानों में से एक बताया जा रहा है। यहां इलेक्ट्रिक कार, मोबाइल और रॉकेट से लेकर न्यूक्लियर पावर तक के लिए कच्चा माल मौजूद है, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

देश के प्रमुख संस्थानों की नई रिपोर्ट के अनुसार, सिवाना में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) का औसत घनत्व अन्य स्थानों की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक दर्ज किया गया है। जहां सामान्यतः यह 100 से 200 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) होता है, वहीं सिवाना में यह बहुत अधिक पाया गया है। यह खोज भारत को इनके उत्पादन में आत्मनिर्भरता दिलाने और वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

सिवाना की चट्टानों में रेयर अर्थ की प्रचुरता

रिपोर्ट बताती है कि सिवाना की चट्टानों में आरईई की प्रचुर मात्रा है। उदाहरण के लिए, यहां नियोबियम की मात्रा 246 से 1681 पीपीएम और जिरकोनियम की मात्रा 800 से 12,000 पीपीएम तक दर्ज की गई है। ये तत्त्व आधुनिक तकनीक और उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भारत के लिए आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त

भारत का लक्ष्य रेयर अर्थ तत्त्वों और सुपर मैग्नेट में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। चीन द्वारा इनके निर्यात पर नियंत्रण के बाद दुनिया भर में इनकी आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसे देखते हुए भारत ने इनकी खोज और अनुसंधान को तेज किया है, साथ ही नीलामी प्रक्रियाएं भी जारी हैं। यदि तेजी से काम किया जाए, तो अगले 5 से 8 वर्षों में भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकता है।

सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स की भूगर्भीय विशेषता

जिस क्षेत्र में यह विशाल भंडार मिला है, उसे सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स कहते हैं। यह लगभग 70 से 80 करोड़ वर्ष पहले (नियोप्रोटेरोजोइक काल) ज्वालामुखी गतिविधियों से बने हिस्सों से निर्मित है। इन चट्टानों की संरचना बाकी जगहों से भिन्न है, क्योंकि इनमें रेयर अर्थ एलिमेंट और कुछ खास धातुओं की प्रचुरता है, जो इसे भूगर्भीय रूप से भी अद्वितीय बनाती है।

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