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राजस्थान

शाही रेल का टेंडर राज शाही अंदाज में ही देने का आरोप, टोल वाले करेंगे आतिथ्य प्रबंधन

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राजस्थान पर्यटन निगम लिमिटेड पर टोल कंपनी को हॉस्पिटैलिटी टेंडर देने में भ्रष्टाचार के आरोप 

HIGHLIGHTS

  1. 1 राजस्थान पर्यटन निगम लिमिटेड पर टोल कंपनी को हॉस्पिटैलिटी टेंडर देने में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं
  2. 2 परंपरागत रूप से, ऐसी निविदाएं आतिथ्य उद्योग में अनुभवी कंपनियों को प्रदान की जाती हैं, जिनके पास इस तरह की सेवाएं देने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता होती है
rajasthan tourism corporation limited accused of corruption in awarding hospitality tender to toll company
Toll Naka and RTDC tender

जयपुर | टोल वाले पैंतालिस रुपए की रसीद के लिए अपशब्दों के माध्यम से वाहन चालकों से पारीवारिक रिश्ते जोड़ लेते हैं। मारपीट तक कर डालते हैं। ऐसे में वे अतिथि सत्कार कैसा करेंगे, आप समझ सकते हैं।

परन्तु यह होगा केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश वाले राजस्थान में। इस निगम के मुखिया है धर्मेन्द्र राठौड़, जिसमें मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। हालाँकि अफ़सरों का कहना है कि टेंडर अभी हुए नहीं है जो भी प्रक्रिया अमल में लाए हैं वह नियमों के अनुसार ही है। 

राजस्थान पर्यटन निगम लिमिटेड (आरटीडीसी) द्वारा एक टोल कंपनी को आतिथ्य प्रबंधन का ठेका देने की चर्चा है। इस कदम ने एसीबी की भौहें उठाई हैं और भ्रष्टाचार के आरोपों को चिंगारी दी है, क्योंकि हॉस्पीटिलिटी इंडस्ट्री में टोल कंपनी के अनुभव की कमी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।

आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ की टीम के फैसले की आलोचना होने लगी है। कहा जा रहा है कि पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह भी इस फैसले से राब्ता नहीं रखते।

विवादास्पद निर्णय
मीडिया जगत में  खबर है कि राजस्थान में एक प्रतिष्ठित पर्यटक आकर्षण, शाही ट्रेन में यात्रा करने वाले मेहमानों के लिए आतिथ्य सेवाओं को सुरक्षित करना है।

परंपरागत रूप से, ऐसी निविदाएं आतिथ्य उद्योग में अनुभवी कंपनियों को प्रदान की जाती हैं, जिनके पास इस तरह की सेवाएं देने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता होती है।

इस मामले में आलोचकों का तर्क है कि टोल कंपनी का मुख्य व्यवसाय टोल एकत्र करने और परिवहन बुनियादी ढांचे का प्रबंधन करने में निहित है, न कि आतिथ्य सेवाएं प्रदान करने में।

अतिथि आवास, भोजन और समग्र अतिथि संतुष्टि की जिम्मेदारी उन्हें सौंपने का निर्णय तर्क को धता बताता है और निर्णय के पीछे के उद्देश्यों के बारे में चिंता पैदा करता है।

इन विसंगतियों ने जयपुर और दिल्ली में संबंधित अधिकारियों के पास मामले की जांच की मांग करते हुए शिकायत और अपील दर्ज करने की मांग उठी है।

ऐसे आरोप हैं कि निविदा प्रक्रिया से समझौता किया गया था और अंडर-द-टेबल डीलिंग ने परिणाम को प्रभावित किया। हालांकि अभी तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है, लेकिन आरोपों की गंभीरता ने मंत्री और अध्यक्ष के बीच विवाद को हवा दे दी है।

यह जरूरी है कि जनता के विश्वास को बनाए रखने और सरकारी निविदाओं के भीतर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए आरोपों की गहन जांच की जाए।

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