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राजस्थान

राजस्थानी भाषा के संवर्धन के लिए आगे आया चळकोई फाउंडेशन

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उदयपुर में राजस्थानी विषय में नियमित अधिस्नातक कर रहे विद्यार्थियों के लिए चळकोई फाउंडेशन द्वारा एक विशेष स्कॉलरशिप वितरण समारोह का आयोजन किया गया।

HIGHLIGHTS

  1. 2 राजस्थानी भाषा के संवर्धन की पहल: चळकोई फाउंडेशन ने राजस्थानी भाषा और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी विषय के छात्रों की फीस भरने की घोषणा की है, जिससे इस भाषा को बढ़ावा मिलेगा।
  2. 3 राजस्थानी भाषा की मान्यता का महत्व: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजवीर सिंह चळकोई ने अपने संबोधन में राजस्थानी भाषा को संवैधानिक और राजकीय मान्यता दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि भाषा और सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।
  3. 4 मातृभाषा अपनाने का आह्वान: प्रोफेसर मदन सिंह राठौड़ और प्रोफेसर दिग्विजय भटनागर ने छात्रों को राजस्थानी भाषा का महत्त्व बताया और घरों में इसे मातृभाषा के रूप में अपनाने का आह्वान किया, जिससे भाषा की प्रासंगिकता बरकरार रह सके।
  4. 5 सम्मान और प्रेरणा: कार्यक्रम में राजस्थानी विषय के विद्यार्थियों को अनुदान और सम्मान पत्र भेंट किए गए, जिससे उन्हें अपनी पढ़ाई में आर्थिक सहायता मिली और राजस्थानी भाषा के प्रति उनकी रुचि और बढ़ी।
rajveer singh chalkoi foundation rajasthan give scholarship for rajasthani language student in udaipur

उदयपुर |  मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में राजस्थानी विषय में नियमित अधिस्नातक कर रहे विद्यार्थियों के लिए चळकोई फाउंडेशन द्वारा एक विशेष स्कॉलरशिप वितरण समारोह का आयोजन किया गया।

यह फाउंडेशन राजस्थानी भाषा और संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य से कार्यरत है और इसके संस्थापक ने राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में राजस्थानी विषय के छात्रों की शैक्षणिक फीस भरने की पहल की है।

इससे पहले, इसी फाउंडेशन द्वारा महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में भी इसी प्रकार का छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

राजस्थानी भाषा के संरक्षण पर जोर
समारोह के मुख्य अतिथि राजवीर सिंह चळकोई ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता और राजकीय दर्जा मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास के संरक्षण के लिए राजस्थानी भाषा का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राजवीर सिंह ने इस दिशा में हर संभव सहायता प्रदान करने का वादा किया, ताकि राजस्थानी भाषा को सशक्त बनाया जा सके और अगली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाया जा सके।

फाउंडेशन की सराहना और मातृभाषा को अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय अधिष्ठाता प्रोफेसर हेमंत द्विवेदी ने चळकोई फाउंडेशन की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की और कहा कि इससे छात्रों को राजस्थानी भाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहयोग मिलेगा।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोफेसर मदन सिंह राठौड़ और प्रोफेसर दिग्विजय भटनागर ने भी राजस्थानी भाषा की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए घरों में इसे मातृभाषा के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक भाषा का भविष्य तभी सुरक्षित रह सकता है जब उसे परिवारों में संवाद के माध्यम के रूप में अपनाया जाए।

विद्यार्थियों को सम्मान और प्रेरणा
राजस्थानी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुरेश साल्वी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए चळकोई फाउंडेशन के योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर राजस्थानी विषय में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को अनुदान के साथ सम्मान पत्र भेंट किए गए। छात्रों ने इस सहायता के लिए फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह अनुदान उनके लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रबंधन टीम की भूमिका
कार्यक्रम का प्रबंधन जगदीश गुर्जर, रावल पंवार और उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।

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