सिरोही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिन पर सिरोही (Sirohi) में हुए रक्तदान शिविर (Blood Donation Camp) में भाजपा (BJP) की संगठनात्मक कमजोरी (Organizational Weakness) दिखी, सिर्फ 13 रक्तदाता (Blood Donors) पहुँचे.
अधिकारियों पर दोषारोपण: नेताओं की विफलता
भाजपा की बैठक में पंचायतीराज मंत्री ओटाराम देवासी और सांसद लुम्बाराम चौधरी ने इस विफलता के लिए जिला कलेक्टर और सीएमएचओ को जिम्मेदार ठहराया. हालाँकि, रक्तदान एक स्वैच्छिक कार्यक्रम था और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करना नेताओं का ही कर्तव्य था. यह स्पष्ट रूप से नेताओं द्वारा अपनी संगठनात्मक कमी को छिपाने का प्रयास था.
अपनी ही सरकार पर अविश्वास
उडवारिया सरपंच जेताराम चौधरी ने बैठक में संकेत दिया कि जब अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं है, तो कार्यकर्ताओं में विश्वास कैसे जागेगा. भाजपा के भीतर भी यह धारणा है कि राजस्थान की भजनलाल सरकार दिल्ली से नियंत्रित होने वाली 'कठपुतली सरकार' है. जनप्रतिनिधियों के पास अधिकार न होने की भावना कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ रही है.
आबूरोड शिविर: श्रेय लेने की होड़
आबूरोड में रक्तदान शिविर संख्यात्मक रूप से थोड़ा बेहतर रहा, लेकिन 250 के लक्ष्य का आधा ही पूरा हो पाया. इसके बावजूद, मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लुम्बाराम चौधरी और प्रधान नितिन बंसल इस कार्यक्रम की सफलता का श्रेय लेने को उत्सुक दिखे. उन्होंने अपने प्रयासों का हवाला दिया, जबकि बंसल ने एक बस भरकर रक्तदाता भेजने का दावा किया.
