हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों की अनदेखी की थी।
निचली अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को रद्द कर आगे की जांच का निर्देश दिया था, लेकिन धारीवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चल रही जांच और निचली अदालत की कार्रवाई को रद्द करने का अनुरोध किया था।
मामले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बावजूद उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार कर लिया और एसीबी और अदालत की कार्यवाही को रद्द कर दिया।
निचली अदालत ने पहले कहा था कि जांच एजेंसी ठीक से जांच नहीं कर रही थी और एक साल तक केस डायरी में एंट्री भी नहीं की थी।
अभियोजन पक्ष ने कथित तौर पर उच्च न्यायालय से तथ्य भी छिपाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति पर ध्यान दिया है और इस मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करने की संभावना है।
मामला परिवादी रामशरण सिंह की गणपति कंस्ट्रक्शन कंपनी को सिंगल लीज जारी करने में धांधली से जुड़ा है। एसीबी ने कंपनी के मालिक शैलेंद्र गर्ग, पूर्व यूडीएच सचिव जीएस संधू, जेडीए जोन-10 के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ओंकारमल सैनी, निष्काम दिवाकर और हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी के अधिकारियों अनिल अग्रवाल और विजय मेहता के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
ऐसे में अब इस मामले के परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है और कानूनी विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों द्वारा समान रूप से बारीकी से देखा जाएगा।