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राजस्थान

लोग बोले बाप ने बिलकुल सही किया,सरकार की स्कीम भी हो गई फेल

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एक बेटी ने प्रेम विवाह क्या किया ,बेटी के इस फैसले से आहात बाप ने बेटी का शोक संदेश छपवा कर रिश्तेदारों में भी बंटवा दिया। किस्सा भीलवाड़ा (राजस्थान) के रतनपुरा गाँव का है।

the father sent a letter for the death of a living daughter people said that the father did absolutely right the scheme of the government also failed

एक बेटी ने प्रेम विवाह क्या किया ,बेटी के इस फैसले से आहत बाप ने बेटी का शोक संदेश छपवा कर रिश्तेदारों में भी बंटवा दिया। किस्सा भीलवाड़ा (राजस्थान) के रतनपुरा गाँव का है। चिट्ठी में लिखा है -

अत्यंत दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि नारायण लाल जी की सुपौत्री और भेरूं लाल लाठी की सुपुत्री सुश्री प्रिया जाट का स्वर्गवास दिनांक 01 -06 -2023 को हो गया है,जिनका पीहर गौरणी शनिवार दिनांक 16 -06 -2023 को प्रातः 9 बजे रखी  गयी है। सो पधारसी। सम्वत 2080 का। 

इस चिट्ठी में पीहर गौरणी यानि शोक सभा के स्थान -चारभुजा नाथजी मंदिर के पास ,रतनपुरा ,भीलवाड़ा के साथ ही सम्पर्क के लिए दो मोबाईल नंबर और शोकाकुल परिवार के सदस्यों - प्रभुलाल ,नारायण लाल ,रामेश्वर लाल ,राधेश्याम,शुभम ,कन्हैयालाल और समस्त लाठी परिवार का नाम भी है। 

इस शोक सन्देश के रिश्तेदारों के बीच पहुँचने के साथ ही सोशल मीडिया पर एक पिता के पुत्री के शोक के लिए जारी सन्देश पर बहस छिड़ गयी है। इस बहस में ज्यादातर लोगों ने बेटी के फैसले से आहत पिता की तारीफ की है ,वहीं 21 वीं सदी में बेटी के साथ कथित आदिम व्यवहार से सामाजिक कार्यकर्त्ता बैचैन भी हैं।  

पत्रकार और रंगकर्मी डॉ केआर गोदारा ने अपने फेसबुक अकाउंट  Drkr Godara से इस शोकसंदेश को साझा करते हुए पूछा है कि -"सही किया या गलत??" गोदारा ने लिखा है -"भीलवाड़ा के रतनपुरा गांव में भेरूलाल जी लाठी की सुपुत्री प्रिया जाट 18 की होते ही अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ भाग गई ...और थाने में अपने मां बाप के लिए कहा कि में इनको नही जानती हूं ...इसके बाद परिवार ने उसके शोक संदेश की चिठ्ठियां बाट दी गांव में।"

गोदारा के सोशल मीडिया पर यह सवाल करते ही ज्यादातर लोग बेटी के बजाय बाप के समर्थन में उतर  गए। प्रतिक्रिया देते हुए  Mahipal Choudhary ने लिखा - "सही ही किया है"  जबकि Sanjay Pachar Choudhary लिखते है -

"आजकल भागने भगाने वाला खेल बहुत ज्यादा हो रहा है, लड़की 18 वर्ष की होते ही अपने प्रेमी के साथ भाग जाती हे और शादी कर लेती है भागती भी ऐसे लड़कों के साथ है जिनके पास खाने के दाने नही होते है और ना ही उनका कोई वजूद होता है.जब उनके भागने/भगाने के कार्यक्रम को 7 या 8 महीने होते है तब दोनो के बीच जमा जम शुरू होती है और दोनो एक दूसरे के खिलाफ़ रिपोर्ट देते रहते है और उनको पश्चाताप होने लगता है लेकिन तब काफ़ी देर हो जाती है। "

Ajaypal Godara ने केआर गोदारा की इस पोस्ट पर विस्तार से लिखते हुए बेटी के व्यवहार से आहत पिता का समर्थन कुछ यूँ किया -

"घर से भागी हुई बेटियों का पिता इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है, पहले तो वो महीनों तक घर से निकलता ही नही और फिर जब निकलता है तो हमेशा सिर झुका कर चलता है, आस पास के मुस्कुराते चेहरों को देख उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हों, जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात नहीं करता, डरता है कहीं कोई उसकी भागी हुई बेटी का नाम न ले ले, जीवन भर डरा रहता है,

अंतिम सांस तक घुट - घुट के जीता है, और अंदर ही अंदर रोता रहता है।प्रेम के नाम पर "पट" जाने वाली मासूम बेटियां नहीं जानती कि वे अपने व अपने पिता के लिए कैसा अथाह दुःख का सागर खरीद रही हैं लेकिन नही जानती की आगे क्या होगा जो मां बाप को छोड़ कर अपने पास आती है तो हम क्या सोचते है कि अपनी वह सेवा करेगी अपने मां-बाप का नहीं सोचा था अपने को किया समझेगी तो बस उसके बेबस पिता की जिंदगी को नरक बना दिया.

पुत्री और पिता के समाज से जुड़े लोगों ने ही नहीं ,दुसरे समाज और वर्ग के लोग भी पिता के पक्ष में टिप्पणी  करने में पीछे नहीं रहे। Hari Krsar Vardha Aasram ने एक -एक कर तीन टिपण्णियां की। और लिखा कि -'ऐसी स्थित पर ऐसा ही करना चाहिए सा। अगली टिप्पणी में  Hari Krsar Vardha Aasram लिखते है - "भगवान ऐसी औलाद किसी को नहीं दें। " Hari Krsar Vardha Aasram ने तीसरी टिप्पणी में तो इससे आगे भी लिखा है -"ऐसी औलाद तो जन्म से मर जानी चाहिए।

प्रेम विवाह या विजातीय विवाह की सूरत में ऐसा करने वाले बेटी या बेटे से रिश्ते तोड़ने ,उनका सामाजिक बहिष्कार करने या अख़बारों में उनसे रिश्ता न रखने जैसे इश्तेहार तो पहले भी आये हैं ,लेकिन शोक सन्देश बांटने का यह पहला वाकया है। दिलचस्प बात यह कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विजातीय विवाहों को बढ़ावा देने की गरज से राजस्थान में प्रोत्साहन राशि और योजना के प्रावधान कर रहे हैं ,लेकिन समाज इसे स्वीकार करने को किसी भी सूरत में तैयार नहीं।
 
सोशल मीडिया पर प्रेम विवाह करने वाली लड़की के समर्थन में भी टिप्पणी हो रही है लेकिन ज्यादा मुखर होकर नहीं। पत्रकार डॉ के आर गोदारा की ही पोस्ट पर डिजटल क्रियेटर  Veera Singh लिखती हैं -"बहुत ही खेदजनक !

इस लड़की से समाज के बड़े और प्रबुद्ध जन बात करें। लड़के और उसके परिवार को समझाएँ। ताउम्र ताने सुनेगी कि भाग कर गई ! और फिर लड़के पर भी तोहमत कि भगा के लाया !

क्या यही प्यार है?

सारी उम्र धब्बा !! और ये जो किया तो क्यों किया? इतनी नफ़रत !! बालिग़ हो अपनी रोटी कपड़ा मकान कमाती आगे पढ़ती तो सही ! कही माँ- बाप अत्यधिक कठोर तो नहीं? इस परिवार को समाज के सभी समझदार जन बैठा कर सुलह करा दें तो बेहतर!!"

ऐसे में सवाल यह है कि विजातीय विवाह के समर्थन में योजनाएं चलाने वाली अशोक गहलोत सरकार इस शोक की चिट्ठी पर कोई संज्ञान लेगी  या नहीं  ?

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