और इस up line track के पास स्थित loop track में एक माल गाड़ी को रोका गया था जिसमें लौह अयस्क (iron ore) था, जिससे तेज गति वाली कोरोमंडल एक्सप्रेस main line track से गुजर जाए।
उसी समय 12864 यशवंतपुर एक्सप्रेस जो बंगाल के हावड़ा की तरफ से आ रही थी वो main down line पर थी और इन दोनों एक्सप्रेस ट्रैंस को इस बाहानगा स्टेशन पर रुकना नहीं था।
इसलिए असिस्टेंट स्टेशन मैनेजर ने यह निर्णय लिया की दोनों मालगाड़ियों को loop tracks पे रोकेंगे, मुख्यत ट्रैन के लिए 2 चीजें सबसे महत्वपूर्ण है वो है ट्रैन की स्पीड और वो किस ट्रैक से जा रही है और यह दोनों अलग-अलग सिस्टम से चलते है।
स्पीड की जिम्मेदारी होती है ट्रैन ड्राइवर की, ट्रैन किसी स्पीड से चलेगी यह सिगनल पैनल से पता चलता है ड्राइवर को और ट्रैन किस ट्रैक पर जाएगी वो सुनिश्चित करता है इंटरलॉकिंग सिस्टम जो मैनुअल भी हो सकता है और इलेक्ट्रॉनिक भी।
उड़ीसा ट्रैन दुर्घटना में जो ट्रैक था वो इलेक्ट्रॉनिक था यह सिस्टम ट्रैन के पायलट को एक सिगनल देता है अगर सिगनल ग्रीन है तो ट्रैन main line से जा सकती है और अगर सिगनल येल्लो है तो ट्रैन को loop line track पे लेना होता है
और यहाँ ये दोनों सिस्टम एक-दूसरे से जुड़े हुए है की किस ट्रैक पर कौनसा सिगनल मिलेगा।
loop line track पे जाते समय ड्राइवर को ट्रैन की गति को कम करना होता है ताकि वो ट्रैन loop line पर रुक सके। लेकिन वहा सिगनल ग्रीन दिखाया गया जिससे ट्रैन main line के जरिए जाए।
लेकिन अचानक ही सिगनल बदल कर येल्लो हो गया, साथ ही ग्रीन सिगनल होने के बावजूद भी ट्रैक loop line की तरफ मुड़ा हुआ था।
ट्रैन की स्पीड तो ग्रीन सिगनल के अनुसार थी (main up line के हिसाब से ) 128 kmph लेकिन रिपोर्ट के अनुसार रूट पैनल पर यह दिख रहा था की ट्रैन को main up line पर जाना था पर ट्रैक का स्विच loop line पर मुड़ा हुआ था।
इन ट्रैक्स के स्विचेस इतनी हाई स्पीड के लिए नहीं बने होते है।
जब आप loop track में घुसो तो आपकी गति धीमी होनी चाहिए, लेकिन यहाँ कोरोमंडल एक्सप्रेस की गति काफी तेज थी जिस कारण से कोरोमंडल एक्सप्रेस सामने खड़ी मालगाड़ी से जाकर टकरा गयी और उसके डिब्बे पटरी से उतर गए।
लेकिन मालगाड़ी उस जगह से टस से मस नहीं हुई जिससे ट्रैन पर बहुत ज्यादा इम्पैक्ट पड़ा और कई लोगों की जाने गयी और कुछ समय बाद यशवंतपुर एक्सप्रेस के पीछे के 3 डिब्बे पटरी से उतर गए क्योंकि कोरोमंडल एक्सप्रेस के 13 डिब्बे आपस में भीड़ गए थे।