Jaipur | यमुना जल के लिए संघर्ष कर रहे हैं झुंझुनूं जिले और शेखावाटी के लोग। नासा की रिपोर्ट के अनुसार यदि दुनिया में सबसे अधिक भू—जल स्तर कहीं गिर रहा है तो वह शेखावाटी का है।
बावजूद इसके सरकारें मौन है। ईआरसीपी परियोजना को अमली जामा पहनाकर केन्द्र ने राजस्थान के पूर्वी हिस्से को तो सौगात दे दी है, लेकिन यह इलाका अब डार्क जोन में है। पीने का पानी नहीं, सिंचाई तो छोड़िए। पेयजल भी घटिया खनिज लवणों से युक्त है। यमुना का पानी राजस्थान को दिए जाने को लेकर 31 हजार करोड़ की परियोजना रिपोर्ट बन चुकी है। इसके बावजूद अभी तक मुद्दा वहीं खड़ा है, जहां शुरू हुआ था। यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक यशवर्धनसिंह शेखावत से जब हमने बात की तो सामने आया कि हालात और भी विकट है और लोग इसके लिए लामबंद हो रहे हैं।
शेखावाटी के किसान यमुना नहर के पानी की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार हैं. पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर यशवर्धन सिंह शेखावत बताते हैं कि शेखावाटी क्षेत्र के किसान यमुना नहर से पानी हासिल करने के अपने दशकों लंबे संघर्ष को लेकर एक बड़े आंदोलन के कगार पर हैं। वर्षों के अधूरे वादों और घटते जल संसाधनों के बाद, अब वे अपने भविष्य की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।
शेखावत के अनुसार झुंझुनू जिले के किसानों कहना है कि 1994 में पांच राज्यों के बीच हुए समझौते के बावजूद उन्हें यमुना नहर से पानी का उनका उचित हिस्सा नहीं मिला है। पानी की यह कमी उनकी आजीविका के प्राथमिक स्रोत कृषि को खतरे में डाल रही है, जिससे कई लोग अपने खेतों को बेचकर खेती ही छोड़ने पर विचार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। जल स्तर में गिरावट और नहर परियोजना पर प्रगति की कमी ने उनकी हताशा को बढ़ा दिया है।