thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 🌺 ज़िंदगानी 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 💡 मनचाही ▶️ YouTube
राजनीति

चलेगी तो गांधी परिवार की ही : रायपुर स्पीच दस साल पहले जयपुर में दिए भाषण की कापी नजर आया, यह 2024 के लिए राहुल गांधी की रिलांचिंग है

thinQ360 thinQ360

कांग्रेस के भाषणों में कापी—पेस्ट बहुत हो रहा है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक साल पुराना जस का तस पढ़ गए। वहीं राहुल गांधी ने भावुकता वाला पुट दस साल पहले वाला कापी किया है। यह हूबहू तो नहीं है, लेकिन अंदाज वैसा ही रहा। जैसा जयपुर में दस साल पहले रहा था। इस भाषण के बाद वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए ग

HIGHLIGHTS

  • कांग्रेस के भाषणों में कापी—पेस्ट बहुत हो रहा है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक साल पुराना जस का तस पढ़ गए। वहीं राहुल गांधी ने भावुकता वाला पुट दस साल पहले वाला कापी किया है।
  • रायपुर सम्बोधन हूबहू तो नहीं है, लेकिन अंदाज वैसा ही रहा। जैसा जयपुर में दस साल पहले रहा था। इस भाषण के बाद वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए थे। अब कहा जा रहा है कि भावुकता की पतवार से यह राहुल की रीलांचिंग है।
rahul gandhi speech in raipur chhatisgarh congress party adhiveshan in jaipur before 10 years

नई दिल्ली | राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में कांग्रेस के 85वें अधिवेशन के तीसरे दिन सम्बोधित करते हुए तीसरे और आखिरी दिन भावुक क्षण ईजाद किए। वैसे तो राहुल ने 32 मिनट के सम्बोधन में भाषण में भारत जोड़ो यात्रा, अडाणी हिंडनबर्ग मामला, चीन पर जयशंकर के बयान, 2024 लोकसभा चुनाव समेत कई मुद्दों पर अपनी बात कही।

राजनीतिक रूप से देखें तो यह सम्बोधन जयपुर के 2023 वाले अधिवेशन का रिपीट है, जिसमें राहुल गांधी की कांग्रेस में लांचिंग हुई थी। सोनिया गांधी ने भले ही संन्यास को लेकर इशारा किया है। परन्तु इस अधिवेशन में लिए गए फैसलों से यह साबित हो गया है कि पार्टी गांधी परिवार से इतर नहीं जाएगी।

राहुल गांधी वैसे तो कांग्रेस का अध्यक्ष खर्गे को बताते हैं, लेकिन लास्ट में उन्हें निर्देश भी दे डाला कि भारत जोड़ो यात्रा जैसी और प्लानिंग की जाए। इससे पहले राहुल ने पार्टी को तपस्वियों की पार्टी भी कहा है। यह पुजारियों की पार्टी नहीं है कहते हुए राहुल ने आरएसएस बीजेपी पर भी निशाना साधा।

यही नहीं एक परिवार एक टिकट वाला सिद्धान्त भी यहां लागू नहीं हुआ, क्योंकि  यह गांधी परिवार पर ही साफ तौर पर लागू होता। हालांकि 1 जनवरी को अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा था कि "कांग्रेस के संविधान के अनुसार, पूर्ण सत्र के साथ सीडब्ल्यूसी का चुनाव भी होगा।"

परन्तु अब पार्टी ने यू टर्न ले लिया है। क्योंकि यदि चुने गए लोगों में ऐसे लोगों का बहुमत हो गया जो मल्लिकार्जुन खड़गे की हर बात मानने को तैयार ना हों तो फिर गांधी परिवार के फैसलों पर ही संकट आ जाएगा।

अब अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे को सभी 23 सदस्यों और शायद 35 सदस्यों को नामित करने की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया। इस प्रकार कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी 35 टीम चुनने के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं। 

राहुल की रीलांचिंग
राहुल गांधी ने दस साल पहले 2013 की जनवरी में हुए जयपुर अधिवेशन में कहा था कि मेरे पिता को मार डाला, दादी को मार डाला। यह भाषण सुनकर सोनिया गांधी भावुक हो गई थी।

ऐसा ही कुछ उन्होंने रायपुर अधिवेशन में कहा है कि 52 साल से घर नहीं है और सोनिया गांधी फिर भावुक हो गईं। यह स्क्रिप्ट लिखने में लगता है कि वहीं राइटर रहा था जो दस सा पहले था। खैर! इस अधिवेशन में ढाक के तीन पात जैसे ही नतीजे आए हैं, जिनके आधार पर वह देश की संजीवनी बनने का दावा कर रही है।

वह केन्द्र की गलतियां ढूंढ रही है, लेकिन अपना विजन धरातल पर नजर नहीं आ रहा। उसके  पास तीन राज्यों में सरकार है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हिमाचल में। परन्तु अस्थिरता का आलम पार्टी पर ऐसे गहरे बादलों को ढंके है। जहां उम्मीदों के सूरज की रोशनी पहुंच नहीं पा रही।

शेयर करें:

ताज़ा खबरें