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राजस्थान

राजस्थान रेल: 25 साल का इंतज़ार: राजस्थान रेल प्रोजेक्ट: 25 साल में 7 सर्वे के बाद भी नहीं बिछी पटरी, सांचौर और जालोर को अब भी रेल कनेक्टिविटी का इंतज़ार

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

राजस्थान के जालोर और सांचौर जिलों में रेल कनेक्टिविटी को लेकर पिछले ढाई दशकों से केवल सर्वे ही हो रहे हैं। रेल मंत्री की नई घोषणा के बाद एक बार फिर उम्मीदें जगी हैं, लेकिन पुराने प्रोजेक्ट्स की स्थिति अब भी अधर में है।

HIGHLIGHTS

  • जालोर और सांचौर में पिछले 25 वर्षों में रेल लाइनों के लिए कुल 7 बार सर्वे किया जा चुका है।
  • रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में जैसलमेर-बाड़मेर-भीलड़ी लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे की घोषणा की है।
  • जालोर-फालना रेल लाइन का प्रोजेक्ट 2013 में 459.26 करोड़ रुपये आंका गया था, जो अब तक अधूरा है।
  • जैसलमेर-भाभर बॉर्डर एरिया रेल लाइन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 5000 करोड़ रुपये से अधिक है।
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जालोर | राजस्थान के जालोर और सांचौर जिलों के निवासियों के लिए रेल सेवा आज भी एक सुनहरे सपने की तरह है। पिछले 25 वर्षों में इस क्षेत्र में रेल लाइन बिछाने के लिए 7 से अधिक बार सर्वे किए जा चुके हैं।

हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जैसलमेर-बाड़मेर-भीलड़ी तक नई रेल लाइन के लिए 'फाइनल लोकेशन सर्वे' की घोषणा की है। इस घोषणा ने क्षेत्र में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को गर्म कर दिया है।

जालोर-फालना रेल लाइन का लंबा इंतज़ार

जालोर-फालना वाया जालोर रेल लाइन का मुद्दा सबसे पहले वर्ष 2001 में उठा था। तब से लेकर अब तक इस 72 किलोमीटर लंबे रूट के लिए तीन बार सर्वे किया जा चुका है।

वर्ष 2013 के रेल बजट में इस प्रोजेक्ट की लागत 459.26 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस रूट पर कानीवाड़ा, आहोर, तखतगढ़ और सांडेराव जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन प्रस्तावित किए गए थे।

योजना के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में 7 स्टेशन, एक रेलवे ओवरब्रिज और 30 अंडरब्रिज बनने थे। हालांकि, कागजों पर दौड़ने वाली यह ट्रेन आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।

बॉर्डर एरिया रेल लाइन: रणनीतिक महत्व और देरी

सांचौर क्षेत्र को रेल सेवा से जोड़ने के लिए वर्ष 2012 में पहली बार आधिकारिक घोषणा हुई थी। इसके बाद फरवरी 2014 में एक विस्तृत सर्वे किया गया था।

इस प्रोजेक्ट के तहत गुजरात के संथालपुर और सुईगांव होते हुए 83 किमी लंबी लाइन बिछनी थी। उस समय इसकी लागत 485 करोड़ रुपये तय की गई थी और रिपोर्ट बोर्ड को भेजी गई थी।

जैसलमेर-भाभर रेल लाइन: 5000 करोड़ का प्रोजेक्ट

फरवरी 2016 में जैसलमेर-भाभर रेल लाइन प्रोजेक्ट की घोषणा की गई थी। यह 339 किमी लंबा एक विशाल प्रोजेक्ट है जिसकी लागत 5000 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

इस प्रोजेक्ट में उंडखा, सनावड़ा, दूठवा और धोरीमन्ना जैसे क्षेत्रों में स्टेशन बनने थे। यह लाइन सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ती है।

सिरोही-बागरा-पिंडवाड़ा रूट की स्थिति

जुलाई 2016 में सिरोही-बागरा-पिंडवाड़ा के बीच 96 किमी लाइन के लिए सर्वे हुआ था। इसकी लागत 1526 करोड़ रुपये प्रस्तावित की गई थी।

हैरानी की बात यह है कि इस रूट के लिए सबसे पहला सर्वे 1958 में हुआ था। दशकों बीत जाने के बाद भी इस क्षेत्र के लोग आज भी रेल की सीटी सुनने को तरस रहे हैं।

क्या होता है फाइनल लोकेशन सर्वे?

रेलवे के विशेषज्ञों के अनुसार, प्रारंभिक सर्वे में केवल रूट तय किया जाता है। लेकिन 'फाइनल लोकेशन सर्वे' में स्टेशनों का निर्धारण और वित्तीय लाभ का आकलन किया जाता है।

यह ट्रैफिक और इंजीनियरिंग का एक संयुक्त सर्वे होता है। इसमें प्रोजेक्ट की 'रेट ऑफ अर्निंग' देखी जाती है। यदि प्रोजेक्ट लाभदायक लगता है, तभी रेलवे बोर्ड इसे वित्तीय स्वीकृति प्रदान करता है।

राजनीतिक बयानबाजी और जनता की उम्मीदें

सांचौर के पूर्व विधायक सुखराम विश्नोई का कहना है कि बार-बार सर्वे कराने से कोई फायदा नहीं है। सरकार को अब धरातल पर काम शुरू करना चाहिए ताकि जनता को लाभ मिले।

वहीं, जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी ने आश्वासन दिया है कि इस बार रेल मंत्री ने स्वयं घोषणा की है। इसलिए जैसलमेर-भाभर प्रोजेक्ट निश्चित रूप से साकार होगा और कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

विकास की राह में बड़ी बाधा

रेल कनेक्टिविटी न होने के कारण जालोर और सांचौर का औद्योगिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों को माल परिवहन के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है, जो काफी महंगा साबित होता है।

क्षेत्र के युवाओं और छात्रों को भी उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाने में काफी कठिनाई होती है। अब देखना यह है कि जून 2025 तक होने वाले नए सर्वे के बाद क्या वास्तव में काम शुरू होगा।

भविष्य की संभावनाएं

यदि ये रेल प्रोजेक्ट्स पूरे होते हैं, तो राजस्थान का पश्चिमी हिस्सा सीधे गुजरात और उत्तर भारत के अन्य राज्यों से जुड़ जाएगा। इससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रेलवे बोर्ड की ओर से अब इन फाइलों पर जमी धूल झाड़ने की तैयारी है। जनता को उम्मीद है कि इस बार सर्वे केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा और पटरियां हकीकत में बिछेंगी।

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