बीकानेर: राजस्थान (Rajasthan) कांग्रेस (Congress) प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) ने बीकानेर (Bikaner) में नरेश मीणा (Naresh Meena) पर तंज कसते हुए कहा कि ट्विटर पर एमएलए पैदा नहीं होते, अंता (Anta) उपचुनाव में प्रमोद जैन भाया (Pramod Jain Bhaya) को टिकट मिलने से मीणा को झटका लगा है।
रंधावा का नरेश मीणा पर तंज: राजस्थान: रंधावा ने नरेश मीणा पर कसा तंज, टिकट पर बड़ा बयान
राजस्थान (Rajasthan) कांग्रेस (Congress) प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) ने बीकानेर (Bikaner) में नरेश मीणा (Naresh Meena) पर तंज कसते हुए कहा कि ट्विटर पर एमएलए पैदा नहीं होते, अंता (Anta) उपचुनाव में प्रमोद जैन भाया (Pramod Jain Bhaya) को टिकट मिलने से मीणा को झटका लगा है।
HIGHLIGHTS
- सुखजिंदर सिंह रंधावा ने नरेश मीणा पर कसा तंज। रंधावा ने कहा, "ट्विटर पर एमएलए पैदा नहीं होते।" कांग्रेस ने अंता उपचुनाव के लिए प्रमोद जैन भाया को दिया टिकट। नरेश मीणा निर्दलीय चुनाव लड़ने पर विचार कर सकते हैं।
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रंधावा का नरेश मीणा पर व्यंग्यात्मक वार
राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बीकानेर में नरेश मीणा पर तंज कसते हुए एक बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि ट्विटर पर एमएलए पैदा नहीं होते, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने से बनते हैं।
रंधावा ने आगे कहा कि यह उनकी गलती थी कि वह नरेश मीणा का ट्वीट नहीं देख पाए थे।
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उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर पहले देख लिया होता, तो वह उनसे मिलने चले जाते, क्योंकि वह तो "बहुत बड़े नेता" हैं।
रंधावा ने खुद को "छोटा आदमी" और नरेश मीणा को "बहुत बड़े नेता" बताकर अपनी बात रखी।
रंधावा का यह बयान राजस्थान के सियासी गलियारों में एक नई बहस का विषय बन गया है।
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने यह टिप्पणी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की मौजूदगी में की, जिससे इस बयान का महत्व और बढ़ गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस में टिकट उसी को मिलता है, जो पार्टी के प्रति पूर्ण निष्ठावान हो और सभी कार्यकर्ताओं व नेताओं को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो।
यह बयान अंता उपचुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे इसके राजनीतिक मायने और भी गहरे हो गए हैं।
अंता उपचुनाव: कांग्रेस का प्रमोद जैन भाया पर दांव और नरेश मीणा को झटका
बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर अपने दिग्गज नेता प्रमोद जैन भाया को उम्मीदवार घोषित किया है।
कांग्रेस के इस फैसले से नरेश मीणा को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, क्योंकि वह भी इस सीट से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, टिकट न मिलने से नाराज नरेश मीणा अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक सकते हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो जाएगा।
यह चुनाव न केवल प्रमोद जैन भाया की राजनीतिक वापसी का एक महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि कांग्रेस के लिए भी 2023 के विधानसभा चुनाव की हार को उलटने का एक सुनहरा मौका है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस महत्वपूर्ण सीट को अपने पास बनाए रखने के लिए अपनी पूरी ताकत और संसाधनों का उपयोग कर रही है।
अंता उपचुनाव का परिणाम आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी अपना प्रभाव डाल सकता है।
अंता सीट पर उपचुनाव की वजह और सियासी महत्व
अंता विधानसभा सीट कंवरलाल मीणा को एक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद खाली हुई थी, जिसके कारण इस पर उपचुनाव कराना अनिवार्य हो गया।
कंवरलाल मीणा ने मनोहर थाना कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था और अपनी सजा माफी के लिए राज्यपाल के पास दया याचिका दायर की थी।
हालांकि, विभिन्न कानूनी अड़चनों के कारण यह प्रक्रिया अभी भी लंबित है, जिससे सीट पर उपचुनाव का मार्ग प्रशस्त हुआ।
अंता सीट पर उपचुनाव का ऐलान हो चुका है, जो न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राजस्थान की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीजेपी इस सीट को जीतकर प्रदेश में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है, जबकि कांग्रेस 2023 के विधानसभा चुनाव की हार का हिसाब चुकाने और अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने के लिए उत्साहित है।
यह उपचुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए एक अग्निपरीक्षा साबित होगा और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।
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