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छात्रसंघ चुनाव बहाली: हाईकोर्ट में सुनवाई: राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाली पर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत

राजस्थान (Rajasthan) में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर हाईकोर्ट (High Court) में अहम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति समीर जैन (Justice Sameer Jain) की एकल पीठ में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी की गई, अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2025 को होगी।

HIGHLIGHTS

  • छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई की लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का उल्लेख कोर्ट ने सिंडिकेट और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2025 को निर्धारित
rajasthan student union election high court hearing
Shubham Rewar in Rajasthan High Court

जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर हाईकोर्ट (High Court) में अहम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति समीर जैन (Justice Sameer Jain) की एकल पीठ में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी की गई, अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2025 को होगी।

छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर हाईकोर्ट में सुनवाई

प्रदेशभर के छात्रों की छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण सुनवाई संपन्न हुई।

शुभम रेवाड और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर माननीय न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता से सुनवाई की।

छात्रों का मौलिक अधिकार और प्रतिनिधित्व

याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव छात्रों का केवल मौलिक अधिकार ही नहीं हैं।

यह छात्रों के प्रभावी प्रतिनिधित्व और उनकी समस्याओं के समाधान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

न्याय मित्र अधिवक्ता अभिनव शर्मा ने कोर्ट को छात्रसंघ चुनावों से संबंधित लिंगदोह कमेटी की महत्वपूर्ण सिफारिशों से अवगत कराया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों और यूजीसी द्वारा जारी निर्देशों का भी विस्तार से उल्लेख किया।

अधिवक्ता शर्मा ने बताया कि कई संस्थान छात्रों से चुनाव के नाम पर शुल्क लेते हैं, लेकिन फिर भी चुनाव नहीं करवाते, जो एक गंभीर मुद्दा है।

कोर्ट की सिंडिकेट और प्रशासन पर टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विश्वविद्यालयों की सिंडिकेट की अथॉरिटी पर गंभीर सवाल उठाए।

माननीय पीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका और कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की।

कोर्ट ने माना कि छात्रों के प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति में उनकी समस्याएं अक्सर अनसुनी रह जाती हैं।

ऐसे में छात्रसंघ का होना अत्यंत आवश्यक है ताकि छात्र अपनी बात उचित और लोकतांत्रिक मंच पर रख सकें।

छात्रसंघ एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है, जो छात्रों को नेतृत्व, संवाद और समाधान की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर प्रदान करता है।

अगली सुनवाई और याचिकाकर्ताओं की पैरवी

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शांतनु पारिक ने प्रभावशाली तरीके से अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर 2025 की तारीख निर्धारित की है।

यह सुनवाई प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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