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राजस्थान में महिला सशक्तिकरण की लहर: मोदी सरकार की योजनाओं से राजस्थान में 15 लाख से अधिक महिलाएं हुईं सशक्त: मदन राठौड़

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत

राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि मिशन शक्ति के तहत राजस्थान में पिछले तीन वर्षों में 15 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। केंद्र सरकार की संबल और सामर्थ्य योजनाओं ने राज्य में महिला सुरक्षा और समृद्धि के नए द्वार खोले हैं।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान में पिछले तीन वर्षों में 15 लाख से अधिक महिलाओं को मिशन शक्ति के तहत लाभ मिला है।
  • वर्ष 2024-25 में लाभार्थी महिलाओं की संख्या बढ़कर 9,35,626 तक पहुंच गई है।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत अकेले 2024-25 में 9 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हुईं।
  • संबल और सामर्थ्य योजनाओं के जरिए महिलाओं को सुरक्षा, न्याय और आर्थिक सहायता दी जा रही है।
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जयपुर | राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने केंद्र सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की सराहना की है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार की नीतियां महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। राजस्थान में 'मिशन शक्ति' के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हो रही है। राठौड़ ने सदन में मिली जानकारी के आधार पर राज्य की प्रगति का विवरण साझा किया।

मिशन शक्ति: संबल और सामर्थ्य

मदन राठौड़ के अनुसार, 'मिशन शक्ति' के तहत 'संबल' और 'सामर्थ्य' दो प्रमुख उप-योजनाएं संचालित की जा रही हैं। 'संबल' का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और तत्काल सहायता सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर (OSC), महिला हेल्पलाइन (181) और 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं। ये योजनाएं महिलाओं को न्याय और सुरक्षा प्रदान करने में सहायक सिद्ध हुई हैं। देशभर में 900 से अधिक वन स्टॉप सेंटर कार्यरत हैं, जिन्होंने लाखों महिलाओं को सहायता प्रदान की है।

राजस्थान में लाभार्थियों का बढ़ता आंकड़ा

राजस्थान में पिछले तीन वर्षों में महिलाओं के सशक्तिकरण के आंकड़ों में भारी वृद्धि देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 4,20,612 महिलाएं इन योजनाओं से लाभान्वित हुई थीं। वर्ष 2023-24 में लाभार्थियों की संख्या 2,03,066 रही, लेकिन 2024-25 में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। इस वर्ष अब तक 9,35,626 महिलाओं को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राजस्थान में महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का असर

'सामर्थ्य' उप-योजना के तहत प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। राजस्थान में इस योजना ने लाखों माताओं को आर्थिक और स्वास्थ्य सहायता पहुंचाई है। आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में 4,05,991 और 2024-25 में 9,16,684 महिलाओं को PMMVY का लाभ मिला। यह योजना महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूती दे रही है। इसके साथ ही शक्ति सदन और सखी निवास जैसी योजनाएं भी महिलाओं को संबल प्रदान कर रही हैं।

सुरक्षा तंत्र हुआ और भी मजबूत

राज्य में वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से हजारों महिलाओं को मदद मिली है। वर्ष 2024-25 में 8,092 महिलाओं ने इन केंद्रों से सहायता प्राप्त की है। महिला हेल्पलाइन (181) भी संकट के समय महिलाओं के लिए बड़ा सहारा बनी है। पिछले तीन वर्षों में हेल्पलाइन के जरिए मदद पाने वाली महिलाओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। राठौड़ ने कहा कि नारी अदालत जैसी पहल महिलाओं को स्थानीय स्तर पर त्वरित न्याय दिलाने में प्रभावी भूमिका निभा रही है।

स्वास्थ्य और जागरूकता पर विशेष ध्यान

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम मातृ स्वास्थ्य के लिए अहम हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और सुमन योजना मातृ मृत्यु दर घटाने में सहायक हैं। भाजपा सरकार महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा को जमीनी स्तर तक ले जा रही है। जागरूकता अभियानों और मजबूत निगरानी तंत्र से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। राठौड़ ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भविष्य की राह और संकल्प

मदन राठौड़ ने बताया कि संकल्प: महिला सशक्तिकरण केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं। पालना योजना के माध्यम से कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल सुनिश्चित की जा रही है। इन प्रयासों से महिलाएं अब सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र महसूस कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य हर महिला तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाना है। संसाधनों को मजबूत कर महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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