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Sirohi : संघ भाव, कर्म और विचारों का समन्वय है: महिपाल सिंह चुली

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श्री क्षत्रिय युवक संघ (Shri Kshatriya Yuvak Sangh) के संस्कार शिविर (Sanskar Shivir) में महिपाल सिंह चुली (Mahipal Singh Chuli) ने कहा कि संघ भाव, कर्म और विचारों का समन्वय है, जो व्यक्तियों को हर दृष्टि से मजबूत बनाता है।

HIGHLIGHTS

  • संघ भाव, कर्म और विचारों का समन्वय है। संघ व्यक्तियों को कर्मशील, विचारवान और भाव से एक बनाता है। संघ समझौता नहीं, बल्कि एक सिद्धांत है। पारिवारिक भाव और मनोबल संघ के शिक्षण के मुख्य आधार हैं।
sangh bhav karm aur vicharon ka samanvay hai mahipal singh chuli

जालोर: श्री क्षत्रिय युवक संघ (Shri Kshatriya Yuvak Sangh) के संस्कार शिविर (Sanskar Shivir) में महिपाल सिंह चुली (Mahipal Singh Chuli) ने कहा कि संघ भाव, कर्म और विचारों का समन्वय है, जो व्यक्तियों को हर दृष्टि से मजबूत बनाता है।

संघ का मूल मंत्र: भाव, कर्म और विचार

मांडोली रोड रामसीन कॉलेज में चल रहे श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्कार शिविर के चौथे दिन शिविर प्रमुख महिपाल सिंह चुली ने महत्वपूर्ण उद्बोधन दिया।

उन्होंने बताया कि संघ में आने वाले हर व्यक्ति को कर्मशील बनने, विचारवान होने और भाव से एक होने का अवसर प्रदान किया जाता है।

यह प्रक्रिया हमें हर दृष्टि से सशक्त और मजबूत बनाने में सहायक होती है।

संघ का मानना है कि साधना के मार्ग में आने वाली बाधाओं और ठोकरों को पार करते जाना चाहिए, क्योंकि संघर्ष के बिना क्षत्रिय का जीवन अधूरा है।

जनबल का महत्व और अनुशासित संगठन

चुली ने जनबल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अकेले तपस्या कर ईश्वर की प्राप्ति तो संभव है।

परंतु यदि समाज और राष्ट्र का कार्य करना है, तो श्रेष्ठ लोगों का जनबल जुटाना अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल भीड़ नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी को भाव और कर्म से एक होकर कार्य करना होगा।

संघ एक अनुशासित संगठन है जो 'एक से अनेक' बनने की बात करता है, जबकि सामान्यतः संगठन 'अनेक से एक' बनने की बात करते हैं।

अलग-अलग विचारों का समूह संगठन नहीं हो सकता, बल्कि एक से बंधे अनेक ही वास्तविक संगठन का निर्माण करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में एक से अधिक पथ प्रदर्शक भटकाव ही लाते हैं, इसलिए संघ समझौता नहीं, बल्कि एक सिद्धांत है।

पारिवारिक भाव और मनोबल का निर्माण

शिविर में पारिवारिक भाव को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

डांट-फटकार, शिक्षण, स्नेह और समय पर काम करवाना, इन सभी के माध्यम से संघ एक अभिभावक के रूप में हमें तैयार करता है।

मनोबल, यानी अपने संकल्प की शक्ति, हमें विपरीत परिस्थितियों में भी गिरने से रोकती है।

आज के संसार में व्याप्त विषमताओं को देखते हुए, परिवार और शिक्षण संस्थाओं में जो हो रहा है, वह सबको ज्ञात है।

इसलिए संघ के शिक्षण की आज सख्त आवश्यकता है।

शिविर में सहयोगी

इस शिविर के उत्तरदायित्व में महेंद्र सिंह कारोला, खुमान सिंह दुदिया, प्रवीण सिंह सुरावा, शिवराज सिंह सागाणा, झबर सिंह लूना, सौभाग्य सिंह पांचोटा, महावीर सिंह पनिया, हिम्मत सिंह कारोला, अमर सिंह ऊण, शैलेन्द्र सिंह उथमण, मोरध्वज सिंह बाला और अर्जुन सिंह देलदरी सहयोगी के रूप में शिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

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