सिरोही: सिरोही (Sirohi) शहर में आवारा गोवंश (stray cattle) के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं, जिससे शहरवासियों में रोष है। नगर परिषद (Nagar Parishad) ने 10 दिनों में 80 गोवंश पकड़े, लेकिन पशुपालकों (cattle owners) ने 52 को रास्ते में छुड़ा लिया। प्रशासक डॉ. राजेश गोयल (Dr. Rajesh Goyal) ने गोशालाओं को भी पाबंद किया है।
गोवंश का आतंक जारी: सिरोही: गोवंश पकड़ने पर पशुपालक छुड़ा ले गए, शहर में रोष
सिरोही (Sirohi) शहर में आवारा गोवंश (stray cattle) के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं, जिससे शहरवासियों में रोष है। नगर परिषद (Nagar Parishad) ने 10 दिनों में 80 गोवंश पकड़े, लेकिन पशुपालकों (cattle owners) ने 52 को रास्ते में छुड़ा लिया। प्रशासक डॉ. राजेश गोयल (Dr. Rajesh Goyal) ने गोशालाओं को भी पाबंद किया है।
HIGHLIGHTS
- नगर परिषद ने 10 दिनों में 80 गोवंश पकड़े, 52 को पशुपालकों ने छुड़ाया। सांड के हमले से बुजुर्ग घायल, मासूम की मौत जैसी कई घटनाएं सामने आईं। प्रशासक ने गोशालाओं को सख्त निर्देश दिए, दोबारा पशु दिखने पर अनुदान बंद होगा। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आवारा पशुओं की जिम्मेदारी नगर निकायों की।
संबंधित खबरें
शहर में गोवंश का आतंक और परिषद की कार्रवाई
सिरोही शहर में खुले घूम रहे गोवंश के कारण लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
पिछले दिनों सदर बाजार में एक बुजुर्ग पर सांड ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
इस घटना के बाद नगर परिषद ने आवारा गोवंश को पकड़कर गोशाला पहुंचाने का अभियान तेज कर दिया है।
संबंधित खबरें
हालांकि, परिषद के कर्मचारियों को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
पशुपालक अपने मवेशियों को गोशाला ले जाते समय रास्ते में ही छुड़ा ले जाते हैं।
पिछले 10 दिनों में परिषद ने 80 गोवंश पकड़े थे।
इनमें से 52 को पशुपालकों ने गोशाला पहुंचने से पहले ही छुड़वा लिया।
प्रशासक डॉ. राजेश गोयल का बयान
नगर परिषद प्रशासक और एडीएम डॉ. राजेश गोयल ने इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर से पशु पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के पहले दिन 37 पशुओं को अर्बुदा गोशाला ले जाया जा रहा था।
रास्ते में ही 25 पशुओं को उनके मालिकों ने छुड़ा लिया।
इसके परिणामस्वरूप, केवल 12 गोवंश ही गोशाला तक पहुंच पाए।
डॉ. गोयल ने बताया कि अब केवल नंदी (नर गोवंश) को पकड़ने का कार्य किया जा रहा है।
शहर से अब तक 30 से 35 नंदियों को गोशाला पहुंचाया जा चुका है।
गोशालाओं को सख्त निर्देश
प्रशासक डॉ. राजेश गोयल ने गोशाला संचालकों को भी सख्त निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि गोशाला में भेजे गए पशुओं पर निशान (मार्क) लगाए गए हैं।
यदि भविष्य में ये पशु सड़कों पर दोबारा दिखाई देते हैं, तो संबंधित गोशाला का अनुदान बंद कर दिया जाएगा।
अर्बुदा गोनंदी तीर्थ गोशाला संचालकों ने परिषद को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
उन्होंने बताया कि परिषद द्वारा लाए जाने वाले गोवंश की गोशाला में पूरी व्यवस्था की जाएगी।
आवारा पशुओं के हमले की घटनाएं
शहर में आवारा गोवंश के हमलों से कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं।
मोहनलाल पर हमला (31 अक्टूबर 2025)
सदर बाजार में दुकान से घर जा रहे 78 वर्षीय मोहनलाल पर एक सांड ने पीछे से हमला कर दिया था।
सांड के हमले से मोहनलाल गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
त्रिशा की मौत (2023)
आबूरोड के सांतपुर में 6 वर्षीय त्रिशा अपने रिश्तेदार के साथ बाइक पर जा रही थी।
गोवंश की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मासूम बालिका पर हमला (दिसंबर 2024)
आबूरोड रेलवे स्टेशन के यात्री प्रतीक्षालय में अपनी मां के साथ सो रही दो साल की मासूम बालिका को एक सांड ने पैरों से रौंद डाला था।
उच्च न्यायालय के निर्देश और मुआवजे का प्रावधान
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका की यह जिम्मेदारी है कि शहर में आवारा पशु न रहें।
न्यायालय ने यह भी कहा है कि गोशालाएं शहर से दूर बनाई जानी चाहिए।
पशु मालिकों और पशुपालकों को अपने मवेशियों को शहर से दूर बाड़े या फार्म हाउस पर रखकर उनके खाने-पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।
आवारा पशुओं के हमले में घायल व्यक्ति को मुख्यमंत्री सहायता कोष के तहत वित्तीय सहायता मिल सकती है।
गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को चोट के आधार पर 20 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जा सकती है।
पशुओं के हमले में किसी व्यक्ति के घायल होने पर नगर परिषद और पशु का मालिक भी जिम्मेदार हो सकता है।
नगर परिषद का दायित्व है कि वह लावारिस पशुओं को पकड़े।
यदि नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में मवेशी नुकसान पहुंचाता है, तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।
पशुपालकों की विडंबना
यह एक बड़ी विडंबना है कि जब तक गाय दूध देती है, पशु मालिक उसे रखते हैं।
दूध देना बंद करने के बाद वे उसे लावारिस छोड़ देते हैं।
पशु मालिकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अक्सर देखा जाता है कि वाहन की टक्कर से पशु की मौत होने पर पशुपालक मुआवजा मांगता है, लेकिन पशु से किसी के चोटिल होने पर नुकसान की भरपाई नहीं की जाती।
इसलिए इस संबंध में नियमों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
वर्तमान अभियान जारी
नगर परिषद के अशोक माली और एसआई महिपाल ने बताया कि प्रशासक डॉ. राजेश गोयल के निर्देश पर सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गोवंश को पकड़ने का अभियान लगातार जारी है।
पहले गोवंश को पकड़कर अर्बुदा गोशाला ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में पशुपालकों ने झगड़ा कर उन्हें छुड़ा लिया था।
इस घटना के बाद से अब तक 16 नंदी को गोशाला में छोड़ा जा चुका है।
ताज़ा खबरें
मोदी सरकार की योजनाओं से राजस्थान में 15 लाख से अधिक महिलाएं हुईं सशक्त: मदन राठौड़
IPL 2026 Schedule: आईपीएल के दूसरे चरण का शेड्यूल जारी, 13 अप्रैल से 24 मई तक होंगे 50 मैच, जानें कब भिड़ेंगे MI और CSK
जोधपुर में ISIS का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त: सोशल मीडिया पर युवाओं का ब्रेनवॉश करने वाला 19 साल का जीशान गिरफ्तार, 'BENX' ग्रुप से फैला रहा था कट्टरपंथ
जोधपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बोले- 'प्रभु श्रीराम सनातन के गौरव और भारत की आत्मा', संत राजाराम जी के 144वें जन्मोत्सव में हुए शामिल