चुरू | काले हरिणों (black stags) का अभयारण्य ताल छापर न केवल विभिन्न वन्य जीवों का सुरक्षित ठिकाना है, बल्कि यह देश-विदेश के पक्षियों को इतना प्रिय है कि यहां न केवल सर्दियों में बल्कि गर्मियों में भी विदेश की धरा से मेहमान पक्षी छुट्टियां मनाने आते हैं, तो यह क्षेत्र चहक उठता है।
ओरियल पक्षी: राजस्थान पहुंचा धूप पड़ते ही चमकने व मीठी आवाज वाला अनोखा पक्षी
गर्मियों में सुनहरे पक्षी गोल्डन ओरियल ने डेरा डाल दिया है |
HIGHLIGHTS
- ताल छापर अभयारण्य में गर्मियों में भी विदेश की धरती से मेहमान पक्षी छुट्टियां मनाने आते हैं
- इंडियन गोल्डन ओरियल इन दिनों सेंकड़ों की तादाद में अभयारण्य में अपना डेरा डाले हुए
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हलांकि सर्दियों में सात समुद्र पार के पक्षियों की कई प्रजातियां यहां आती है, लेकिन अब गर्मियों में सुनहरे पक्षी गोल्डन ओरियल (golden oriole) ने डेरा डाल दिया है। काले हरिणों (black stags) की पनाहगाह के तौर पर पहचान रखने वाले ताल छापर अभयारण्य (Tal Chhapar Sanctuary) में सर्दियां बिताने के लिए करीब 350 से भी अधिक प्रजातियों के पक्षी आए थे, जो मार्च महीना के बाद ये मेहमान पक्षी अपने घरों की ओर रूख कर गए।
विदेशी पावणे पक्षी (exotic sacred birds) अपने वतन लौटने के बाद धोरों की तपति जमीं पर कुछ ऐसे पक्षी आते हैं, जो अभयारण्य के सूनेपन को अपनी चमक से आबाद करते है। ऐसा ही एक मेहमान पक्षी इंडियन गोल्डन ओरियल (Indian Golden Oriole) इन दिनों सेंकड़ों की मात्रा में अभयारण्य में अपना डेरा डाले हुए हैं।
मध्य एशिया का भ्रमण करता है ओरियल
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भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया में पाया जाने वाला दुर्लभ पक्षी इंडियन गोल्डन ओरियल (Indian Golden Oriole) का समूह वर्तमान में ताल छापर अभयारण्य की खुली ज़मीन में उड़ान भर रहा है। मध्य एशिया की सैर करने वाला ओरियल इन दिनों ताल छापर अभयारण्य में सैर-सपाटा करने आ गया है।
क्षेत्रीय वन अधिकारी (forest officer) उमेश बागोतिया ने बताया की यह पक्षी यूरोपियन गोल्डन ओरियल (european golden oriole) की एक प्रजाति है। जो उत्तर भारत के हिमालय क्षेत्र, पाकिस्तान, बलूचिस्तान में रहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम (scientific name) ओरिओलस कुंडू है तो स्थानीय भाषा (local language) में इसे पिलूक के नाम से जाना जाता है।
सोने के समान चमकता है ओरियल
इंडियन गोल्डन ओरियल पक्षी काफी सुंदर दिखता है। धूप पड़ने नाम के अनुसार सोने जैसा चमकता है। इसलिए इसके नाम में सुनहरा (Golden) शब्द आता है। इंडियन गोल्डन ओरिओल एक मध्यम आकार का ओरिओल (Oriole) है, जिसकी लंबाई 23 से 26 सेमी और वजन 60 से 100 ग्राम होता है।
नर ओरिओल (male oriole) का सिर, ऊपरी हिस्सा और निचला हिस्सा गहरे पीले रंग का होता है। पंख बड़े पीले धब्बों के साथ काले होते हैं। ऊपरी पूंछ काली होती है और बाहरी पंखों का किनारा पीला होता है। मादा के पंख हल्के पीले रंग के होते हैं। गला, स्तन और पेट पीली और काली धारियों से सफेद होती है। किशोरों के पंख और पूंछ भूरे रंग के होते हैं और जोड़ हल्के पीले रंग के होते हैं।
ओरिओल की आवाज एक बांसुरीदार मधुर पीलो..पीलो या वी..वी..वी ध्वनि के जैसी होती है। पक्षी के साहित्य (literature) के अनुसार यह भारतीय उपमहाद्वीप (Indian subcontinent) में पाया जाने वाला यह पक्षी सर्दियों में दक्षिण भारत (South india) की ओर प्रवास करता है। पतझड़, सदाबहार जंगलों के अलावा बगीचों में भी यह रहता है। ताल छापर कृष्ण मृग अभयारण्य में इन दिनों अपनी सुनहरी उड़ान व मधुर आवाज से पर्यटकों (tourists) का मन मोह रहा है।
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