जयपुर | राजस्थान की राजनीति में सियासी भूचाल लाते हुए सोमवार को बाबा नाथूराम मिर्धा की पोती और पूर्व कांग्रेस सांसद ज्योति मिर्धा (Jyoti Mirdha) भाजपा में शामिल हो गईं।
भाजपा का दांव: ज्योति मिर्धा के जरिए हनुमान बेनीवाल को नागौर की धरती पर ही चित्त करने की तैयारी
ज्योति मिर्धा के कांग्रेस का हाथ छोड़ने और भाजपा का दामन थामने के बाद हनुमान बेनीवाल के लिए अब नागौर की सीट सियासी रूप से बहुत जटिल हो गई है। हनुमान बेनीवाल अकेले लड़ते हैं तो उनके लिए जीत की राह बेहद मुश्किल होगी।
HIGHLIGHTS
- ज्योति मिर्धा के कांग्रेस का हाथ छोड़ने और भाजपा का दामन थामने के बाद हनुमान बेनीवाल के लिए अब नागौर की सीट सियासी रूप से बहुत जटिल हो गई है। हनुमान बेनीवाल अकेले लड़ते हैं तो उनके लिए जीत की राह बेहद मुश्किल होगी।
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ज्योति मिर्धा ने दिल्ली भाजपा मुख्यालय में आज बीजेपी जॉइन की।
ज्योति मिर्धा के कांग्रेस का हाथ छोड़ने और भाजपा का दामन थामने के बाद नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
तो क्या ज्योति मिर्धा को नागौर सीट से उतारने की तैयारी
दअसल, सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा को नागौर सीट पर मजबूत उम्मीदवार मिल गया है और भाजपा ज्योति को नागौर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है।
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भले ही ज्योति मिर्धा पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट से एनडीए के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल से हार गई हो, लेकिन इस बार समीकरण बदल गए हैं।
पिछली बार हनुमान बेनीवाल ने भाजपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था, लेकिन अब उनका बीजेपी से गठबंधन टूट चुका है।
ऐसे में हनुमान बेनीवाल के लिए अब नागौर की सीट सियासी रूप से बहुत जटिल हो गई है। हनुमान बेनीवाल अकेले लड़ते हैं तो उनके लिए जीत की राह बेहद मुश्किल होगी।
मिर्धा परिवार की नागौर की सियासत पर जोरदार पकड़
ज्योति मिर्धा ने भाजपा का दामन थाम कर बीजेपी को बड़ी राहत दी है। भाजपा को नागौर से मजबूत चेहरे की तलाश थी।
ज्याति मिर्धा का परिवार नागौर की सियासत पर जोरदार पकड़ रखता है।
ज्योति मिर्धा खुद तो 6 बार के सांसद रहे बाबा सा नाथूराम मिर्धा की पोती हैं ही साथ ही उनके चाचा यानि नाथूराम मिर्धा के बेटे भानुप्रकाश मिर्धा भी राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं।
भानुप्रकाश मिर्धा भाजपा की टिकट पर नागौर से सांसद रह चुके हैं। उन्होंने नाथूराम मिर्धा के देहांत के बाद उपचुनाव में दिग्गज नेता रामनिवास मिर्धा को हराया था, लेकिन बाद में वे सियासत से दूर हो गए।
26 जुलाई 1972 को जन्मी ज्योति मिर्धा के पिता राम प्रकाश मिर्धा और मां वीणा मिर्धा हैं। ज्योति मिर्धा 2009 में नागौर सीट से सांसद रहीं, लेकिन 2014 और 2019 में लोकसभा चुनाव हार गईं थीं।
मिर्धा को 2014 में बीजेपी के सीआर चौधरी ने और 2019 में एनडीए की तरफ से प्रत्याशी रहे हनुमान बेनीवाल ने हराया था।
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