जयपुर | राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों में राजस्थान पुलिस से जुड़ा एक बहुत ही चिंताजनक रिकॉर्ड सामने आया है। वर्ष 2023 में पुलिस हिरासत या जेल से अपराधियों के फरार होने के मामलों में राजस्थान पूरे देश में पहले स्थान पर रहा है। एनसीआरबी की नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में राजस्थान में कुल 90 अपराधी पुलिस हिरासत से फरार हुए। इन आंकड़ों ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुलिस की कड़ी निगरानी के बावजूद भागने में सफल रहे।
Rajasthan: एनसीआरबी रिपोर्ट 2023: राजस्थान में हिरासत से 90 अपराधी फरार, देश में सबसे खराब रिकॉर्ड
राजस्थान में साल 2023 के दौरान पुलिस हिरासत से 90 अपराधी फरार हुए जो देश में सबसे अधिक है। इनमें से अधिकांश पेशी के दौरान भागे।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान में वर्ष 2023 में कुल 90 अपराधी पुलिस हिरासत या जेल से फरार हुए। पेशी के दौरान भागने वाले अपराधियों की संख्या 87 रही जबकि 3 ने जेल तोड़ी। फरार अपराधियों के मामले में महाराष्ट्र दूसरे और मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर रहा। केरल में फरार अपराधियों को दोबारा पकड़ने की दर देश में सबसे बेहतर रही।
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फरारी के आंकड़ों का विश्लेषण
एनसीआरबी की रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 90 अपराधियों में से 87 अपराधी तब फरार हुए जब उन्हें पेशी के लिए कोर्ट ले जाया जा रहा था या किसी अन्य कारण से जेल से बाहर ले जाया जा रहा था। केवल 3 अपराधी ऐसे थे जिन्होंने जेल की दीवार फांदकर या जेल तोड़कर भागने में सफलता प्राप्त की। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि अपराधियों के लिए जेल के बाहर पुलिस की गिरफ्त से छूटना अधिक आसान हो गया है। हालांकि पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए इन फरार अपराधियों में से 53 को दोबारा गिरफ्तार कर लिया है लेकिन शेष अपराधी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं जो समाज के लिए एक बड़ा खतरा बने हुए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की स्थिति
देशभर की बात करें तो वर्ष 2023 में कुल 833 अपराधी पुलिस हिरासत से फरार हुए। इनमें से लगभग 10.8 प्रतिशत अपराधी अकेले राजस्थान से थे। इस सूची में राजस्थान के बाद महाराष्ट्र का स्थान आता है जहां से 81 अपराधी फरार हुए और मध्य प्रदेश 76 अपराधियों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। अपराधियों की दोबारा गिरफ्तारी के मामले में राजस्थान का प्रदर्शन औसत रहा है और वह इस सूची में तीसरे नंबर पर है। केरल इस मामले में सबसे आगे रहा जहां 44 फरार अपराधियों में से 43 को पुलिस ने फिर से दबोच लिया। केरल की इस सफलता का मुख्य कारण वहां का डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और बेहतर जेल प्रबंधन माना जा रहा है।
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पुलिस की लापरवाही और कार्रवाई
रिपोर्ट में पुलिस की लापरवाही का भी जिक्र किया गया है। राजस्थान में अपराधियों के भागने के इतने मामलों के बावजूद केवल एक मामले में पुलिस लापरवाही का केस दर्ज किया गया। हालांकि 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई और उनमें से 7 को गिरफ्तार भी किया गया। जनवरी 2024 तक इनमें से 7 पुलिसकर्मियों को सजा भी सुनाई जा चुकी है। मध्य प्रदेश की तुलना में राजस्थान में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कम देखी गई क्योंकि वहां 6 मामलों में 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सुरक्षा में तैनात कर्मियों की जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।
अतीत की बड़ी घटनाएं
राजस्थान में अपराधियों के फरार होने का इतिहास काफी पुराना और चर्चित रहा है। सितंबर 2025 में जयपुर सेंट्रल जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे नवल किशोर महावर और अनस कुमार फरार हो गए थे। इसी तरह जोधपुर कोर्ट से एक साथ 16 आरोपियों के फरार होने की घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इससे पहले 2019 में कुख्यात गैंगस्टर पपला गुर्जर को उसके साथियों ने बहरोड़ थाने के लॉकअप पर हमला करके छुड़ा लिया था। आनंदपाल सिंह का मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था जब 2015 में उसके साथियों ने पुलिस वैन पर फायरिंग कर उसे परबतसर के पास से छुड़ा लिया था। ये घटनाएं साबित करती हैं कि राजस्थान में अपराधी संगठित तरीके से पुलिस को चुनौती दे रहे हैं।
सुधार के लिए विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों और सुरक्षा जानकारों का कहना है कि राजस्थान में जेल प्रबंधन और कैदियों के परिवहन की व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की आवश्यकता है। हाई रिस्क अपराधियों के लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम होने चाहिए। जेलों की दीवारों पर बिजली के तार और आधुनिक सेंसर लगाए जाने चाहिए। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना अनिवार्य है। अधिकांश अपराधी पेशी के दौरान भागते हैं इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालती सुनवाई को बढ़ावा देना चाहिए ताकि अपराधियों को बार-बार जेल से बाहर न ले जाना पड़े। फरार अपराधी अक्सर गवाहों और परिवादियों को डराते हैं जिससे न्याय प्रक्रिया बाधित होती है।
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