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सफलता की कहानी

एक्सीडेंट के बाद चलना-फिरना बंद हुआ तो व्हीलचेयर पर बैठकर किए 100 से ज्यादा ऑपरेशन 

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व्हीलचेयर पर ही सही पर हर दिन अस्पताल में दर्जनों मरीजों को परामर्श देते हैं और करीब एक साल में व्हीलचेयर पर ही 100 से ज्यादा ऑपरेशन कर चुके हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 1 व्हीलचेयर पर ही सही पर हर दिन अस्पताल में दर्जनों मरीजों को परामर्श देते हैं और करीब एक साल में व्हीलचेयर पर ही 100 से ज्यादा ऑपरेशन कर चुके हैं।
bharatpur dr. jagbir singh more than 100 operations done while sitting on wheelchair after accident
Dr. Jagbir Singh

भरतपुर | दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके बुलंद हौसलों को देखकर सलाम करने का दिल कर उठता है। 

राजस्थान में भी एक ऐसे शख्स हैं जो खुद ट्राइसाइकिल पर चलते हैं लेकिन दूसरों की जिंदगी में खुशिया भर देते हैं। 

भरतपुर में एक ऑर्थाेपेडिक सर्जन डॉक्टर जगबीर सिंह ऐसे ही व्यक्ति हैं। 

इनके बुलंद हौसले ने हर किसी को चौंका दिया है। 

55 साल के डॉ. जगबीर सिंह एक बेहतरीन साइकिलिस्ट हैं और खुद का निजी अस्पताल भी चलाते हैं। 

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. साब का साइकिल का शौक उन पर इतना भारी पड़ गया कि एक एक्सीडेंट में उनका चलना-फिरना ही बंद हो गया।

लेकिन उन्होंने न ही हिम्मत हारी और न ही अपना डॉक्टरी का काम रोका।

व्हीलचेयर पर बैठकर किए 100 से ज्यादा ऑपरेशन 

डॉ. सिंह के हौसले और उन पर मरीजों के विश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर 100 से ज्यादा मरीजों के ऑपरेशन किए हैं। 

डॉ. सिंह ने बताया कि दुर्घटना के 4 महीने बाद ही उन्होंने मरीजों को देखना शुरू कर दिया था।

व्हीलचेयर पर ही सही पर हर दिन अस्पताल में दर्जनों मरीजों को परामर्श देते हैं और करीब एक साल में व्हीलचेयर पर ही 100 से ज्यादा ऑपरेशन कर चुके हैं।

साइकिल रेस में हो गया था एक्सीडेंट 

साल 2021 में पुणे में अप एंड डाउन हिल्स 200 किमी की साइकिल रेस में डॉक्टर जगबीर सिंह ने भाग लिया था और उसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वे एक खंभे से जा टकराए थे।

इस दुर्घटना में वो गंभीर रूप से जख्मी हो गए और उनके हाथ से दो पहियों की साइकिल की जगह तीन पहियों की व्हीलचेयर आ गई। 

डॉ. साब महीनों बेड पर पड़े रहे और जब थोड़ा उठे तो ट्राइसाइकिल के सहारे, लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी।

डॉ. जगवीर सिंह ने बताया कि अमेरिका में महीनों उपचार चला। घर वापसी हुई, लेकिन चोट की वजह से साइकिल छूट गई।

साइकिल चलाने का जुनून ऐसा था कि एक्सीडेंट के बाद पैर की बजाय हाथ से चलने वाली ट्राइसाइकिल को अपनाया। 

घर में ही करीब 130 मीटर का साइकिल ट्रैक तैयार करवाया और हर दिन सुबह जल्दी उठकर 5 किमी ट्राइसाइकिल चलाते हैं।  यहीं नहीं, 2 किमी बैक ट्राइसाइकिल भी चलाते हैं।

हर दिन ट्राइसाइकिल चलाने के साथ ही स्विमिंग, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस भी खेलते हैं।

अब डॉ. साब की जिद है कि नवंबर 2023 तक पैरों पर फिर से खड़ा होना है। 

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