मुंबई | भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र की राजनीति में उत्तर भारतीय चेहरा कहे जाने वाले राज के. पुरोहित का आज मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।
राज पुरोहित का जाना न केवल भाजपा के लिए बल्कि मुंबई की उस राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है, जहाँ वे राजस्थानी समाज और स्थानीय मराठी मानुस के बीच एक सेतु की तरह कार्य करते थे। उन्हें मुंबादेवी का शेर कहा जाता था, क्योंकि उन्होंने उस दौर में भाजपा का परचम लहराया जब दक्षिण मुंबई कांग्रेस का अभेद्य किला मानी जाती थी। राज पुरोहित का जन्म राजस्थान के सिरोही जिले में हुआ था, लेकिन उनकी कर्मभूमि मुंबई रही। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की और धीरे-धीरे भाजपा के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शुमार हो गए।
1990 के दशक में जब मुंबई में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन अपनी जड़ें जमा रहा था, तब राज पुरोहित ने मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र को भाजपा का गढ़ बना दिया। वे यहाँ से लगातार चार बार विधायक चुने गए। 1995 की युति सरकार में उन्हें आवास और शहरी विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी, जहाँ उन्होंने मुंबई के किरायेदारों और पगड़ी सिस्टम के तहत रहने वाले लोगों के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। हालाँकि, राज पुरोहित का करियर जितना उपलब्धियों भरा रहा, उतना ही विवादों के साये में भी रहा।
उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट जून 2015 का वह कथित स्टिंग ऑपरेशन था, जिसने दिल्ली से लेकर मुंबई तक हड़कंप मचा दिया था। एक गुप्त वीडियो में पुरोहित अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते नजर आए थे। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि पार्टी में अब सामूहिक नेतृत्व नहीं बचा है और केवल नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ही चलती है। इतना ही नहीं, उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बेचारा बताते हुए कहा था कि वे दिल्ली और स्थानीय लॉबी के दबाव में काम कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद भाजपा ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।