हनुमानगढ़ | राजस्थान में भीषण सड़क हादसे की खबर सामने आई है जिसमें 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है और कई घायल बताए जा रहे हैं।
हनुमानगढ़ में भीषण हादसा: गोगामेड़ी में दर्शन करने दो कारों में निकले थे श्रद्धालु, दोनों कारें खाई में गिरी, 5 की मौत, पांच घायल
होटल से खाना खाने के बाद दोनों कारें साथ चल रही थी। अंधेरा हो गया था। इसी दौरान रास्ते में खतरनाक घुमाव आया और दोनों कारें अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी।
HIGHLIGHTS
- होटल से खाना खाने के बाद दोनों कारें साथ चल रही थी। अंधेरा हो गया था। इसी दौरान रास्ते में खतरनाक घुमाव आया और दोनों कारें अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी।
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जानकारी के अनुसार, रियाणा के कुरुक्षेत्र से दो कारों में सवार होकर 10 लोग हनुमानगढ़ जिले में स्थित गोगामेड़ी गोगाजी के दर्शन करने के लिए निकले थे।
तभी अंधेरा हो जाने के कारण छानी बड़ी से एक किलोमीटर पहले ही एक घुमाव पर दोनों ही कारें अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी।
इस हादसे में 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 5 घायल हो गए।
होटल में खाया था खाना
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ये हादसा रविवार शाम को होना बताया जा रहा है। जानकारी में सामने आया है कि हादसे से पहले कार सवार श्रद्धालुओं ने बेर गांव में एक होटल में खाना खाया था।
सभी लोग काफी खुश थे और बड़े आनंद के साथ आगे का सफर तय करने के लिए निकल पड़े थे।
साथ चल रही थी दोनों कारें
होटल से खाना खाने के बाद दोनों कारें साथ चल रही थी। अंधेरा हो गया था। इसी दौरान रास्ते में खतरनाक घुमाव आया और दोनों कारें अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी।
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन और पूर्व सरपंच सुरेश बंसल के साथ ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे।
पुलिस और ग्रामीणों ने कारों में फंसे घायल श्रद्धालुओं को बाहर निकाला और भादरा के राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया।
जिनमें से तीन गंभीर घायलों को हिसार रैफर कर दिया गया। सभी घायलों का इलाज जारी है।
गोगामेड़ी में दर्शन करने आते हैं लाखों श्रद्धालु
आपको बता दें कि राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी में लोक देवता गोगाजी का मंदिर हैै। यहां राजस्थान के अलावा हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, बिहार से लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
यहां सभी धर्मों के लोग अपनी आस्था प्रकट करते है। गोगादेव गुरुभक्त, वीर योद्ध ओर प्रतापी राजा थे। गुरु गोरखनाथ के परमशिष्य थे। गौरतलब है कि गुरु गोरखनाथ जी ने यहां 12 वर्ष तपस्या की थी। यहां धुने पर भी लोग माथा टेकते है और मन्नत मांगते है।
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