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हरियाणा में हीरो बने, राजस्थान में जीरो!: दुष्कर्मी पकड़ा, पुलिसकर्मी सस्पेंड: ये कैसा न्याय है भाई?

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डीडवाना (Didwana) जिले के जसवंतगढ़ (Jaswantgarh) थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के आरोपी को हरियाणा (Haryana) से पकड़ना चार पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। थाना प्रभारी जोगेंद्र सिंह (Jogendra Singh) समेत चार पुलिसकर्मी बिना वारंट कार्रवाई के लिए सस्पेंड हुए, राजनीतिक दबाव की भी चर्चा है।

HIGHLIGHTS

  • दुष्कर्म के आरोपी को हरियाणा से पकड़ना पुलिसकर्मियों को महंगा पड़ा। थाना प्रभारी जोगेंद्र सिंह सहित चार पुलिसकर्मी निलंबित किए गए। बिना वारंट हरियाणा में कार्रवाई करने पर हुई शिकायत। निलंबन के पीछे राजनीतिक दबाव का भी आरोप।
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डीडवाना: डीडवाना (Didwana) जिले के जसवंतगढ़ (Jaswantgarh) थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के आरोपी को हरियाणा (Haryana) से पकड़ना चार पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। थाना प्रभारी जोगेंद्र सिंह (Jogendra Singh) समेत चार पुलिसकर्मी बिना वारंट कार्रवाई के लिए सस्पेंड हुए, राजनीतिक दबाव की भी चर्चा है।

हीरो बनने चले थे, बन गए 'जीरो'

अक्सर फिल्मों में पुलिस वाले विलेन को पकड़ने के लिए सरहदें लांघ जाते हैं और तालियां बटोरते हैं, लेकिन डीडवाना जिले के जसवंतगढ़ थाने के चार जांबाजों के साथ तो उल्टा ही हो गया है।

दुष्कर्म के एक फरार आरोपी को हरियाणा से दबोचकर लाने की 'वीरता' उन्हें भारी पड़ गई और अब उनकी नौकरी पर तलवार लटक गई है।

थाना प्रभारी जोगेंद्र सिंह, हेड कॉन्स्टेबल महेश, महिला कॉन्स्टेबल सुभिता और कॉन्स्टेबल बबलेश को निलंबित कर दिया गया है, मानो उन्होंने कोई गंभीर अपराध कर दिया हो।

शायद उन्हें लगा होगा कि अपराधी को पकड़ना ही उनका काम है, लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था में 'प्रक्रिया' का भी अपना ही जलवा है।

नियमों का 'कठोर' पालन या कुछ और?

मामला यह है कि जसवंतगढ़ थाना क्षेत्र में कुछ समय पहले एक एससी-एसटी वर्ग की महिला से दुष्कर्म का संगीन मामला दर्ज हुआ था।

आरोपी फरार था और पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि वह पड़ोसी राज्य हरियाणा में जाकर छिपा हुआ है।

इस पर थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने बिना किसी देरी के हरियाणा जाकर आरोपी को धर दबोचा, वाह क्या फुर्ती थी!

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को बाकायदा न्यायिक अभिरक्षा में भी भेज दिया गया था, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी थी।

लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं से आता है, जब किसी 'कानून के रखवाले' ने शिकायत दर्ज करा दी कि पुलिस ने हरियाणा में बिना वारंट और औपचारिक अनुमति के कार्रवाई की है।

अब सवाल यह है कि क्या एक फरार दुष्कर्मी को पकड़ना इतना बड़ा गुनाह था कि नियमों के नाम पर पुलिसकर्मियों को ही सस्पेंड कर दिया जाए?

राजनीति का 'तड़का' और पुलिस की 'खिचड़ी'

यह शिकायत पुलिस मुख्यालय तक पहुंची और एसपी स्तर पर आनन-फानन में जांच बिठाई गई, जिसमें 'प्रक्रिया के उल्लंघन' को आधार बनाकर निलंबन का फरमान जारी हो गया।

बेचारे पुलिसकर्मी अब सोच रहे होंगे कि दुष्कर्मी को पकड़ना गुनाह था या फिर बिना 'रेड टेप' के काम करना?

पुलिस सूत्रों की मानें तो इस पूरी कार्रवाई के पीछे 'राजनीतिक दबाव' की भूमिका भी बताई जा रही है, क्योंकि आरोपी पक्ष के लोग काफी प्रभावशाली बताए जाते हैं।

लगता है, अब पुलिस वालों को अपराधियों को पकड़ने से पहले 'पॉलिटिकल क्लीयरेंस' और 'परमिशन की लंबी लिस्ट' भी चेक करनी पड़ेगी, वरना 'हीरो' से 'जीरो' बनने में देर नहीं लगती।

फिलहाल, इन चारों बहादुर पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक वे सस्पेंड ही रहेंगे।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कभी-कभी 'सही काम' करने की कीमत भी चुकानी पड़ती है, खासकर जब आप वर्दी में हों और 'सिस्टम' के खिलाफ जाएं!

उम्मीद है कि जांच में दूध का दूध और पानी का पानी होगा और इन पुलिसकर्मियों को न्याय मिलेगा, ताकि भविष्य में कोई पुलिसवाला अपराधी को पकड़ने से पहले सौ बार न सोचे।

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