जयपुर: जयपुर (Jaipur) डिजिटल टेरर (Digital Terror) के मामलों में देश में पांचवें स्थान पर है। एक साल में 61 बार ई-मेल से बम धमाके की धमकियां मिलीं, जो सभी फर्जी निकलीं। सुरक्षा एजेंसियां (Security Agencies) अधिकांश आरोपियों का पता नहीं लगा पाई हैं, क्योंकि अपराधी वीपीएन (VPN) का उपयोग कर रहे हैं।
Rajasthan: जयपुर में ई-मेल से 61 फर्जी बम धमकियां, देश में 5वें नंबर पर
जयपुर (Jaipur) डिजिटल टेरर (Digital Terror) के मामलों में देश में पांचवें स्थान पर है। एक साल में 61 बार ई-मेल से बम धमाके की धमकियां मिलीं, जो सभी फर्जी निकलीं। सुरक्षा एजेंसियां (Security Agencies) अधिकांश आरोपियों का पता नहीं लगा पाई हैं, क्योंकि अपराधी वीपीएन (VPN) का उपयोग कर रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- जयपुर में एक साल में 61 फर्जी बम धमकियां मिलीं। शहर डिजिटल टेरर के मामलों में देश में पांचवें स्थान पर। अपराधी वीपीएन का उपयोग कर ट्रेस होने से बच रहे हैं। निजी स्कूल, स्टेडियम, एयरपोर्ट और कोर्ट को निशाना बनाया गया।
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एक साल में मिली इन 61 फर्जी बम धमकियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। हर बार सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस टीमें मौके पर पहुंचीं, जिससे सरकारी संसाधनों का भारी दुरुपयोग हुआ।
इन सभी मामलों में अब तक केवल एसएमएस स्टेडियम में झूठी धमकी देने वाली एक महिला का ही पता चल पाया है। बाकी मामलों में आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं, जिससे शहर में लगातार दहशत का माहौल बना हुआ है।
अपराधियों के लिए वीपीएन बनी ढाल
भारत में वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का उपयोग वैध है, जिसका फायदा उठाकर कई अपराधी विदेशी सर्वरों के माध्यम से धमकी भरे ई-मेल भेजते हैं। ऐसे सर्वरों के कारण उन्हें ट्रेस करना बेहद कठिन हो जाता है, जिससे जांच एजेंसियों को बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
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हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सर्वर लॉग्स, मेटाडेटा और डिवाइस फॉरेंसिक के जरिए सही कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए तो आरोपियों तक पहुंचना संभव है। यह प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली होती है।
विभिन्न संस्थानों को बनाया निशाना
साल 2025 में अब तक जयपुर में कुल 61 बार बम होने की ई-मेल धमकियां मिल चुकी हैं। इनमें से 29 धमकियां निजी स्कूलों को मिलीं, जिससे बच्चों और अभिभावकों में भय का माहौल पैदा हुआ।
इसके अलावा, एसएमएस स्टेडियम को 7 बार, एयरपोर्ट को 4 बार, और हाईकोर्ट, सेशन कोर्ट व कलेक्ट्रेट को 11 बार धमकियां दी गईं। मेट्रो स्टेशन और विभिन्न अस्पतालों को भी 10 बार निशाना बनाया गया, जिससे सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान आया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह केवल शरारत नहीं रह गई है, बल्कि यह साइबर वॉरफेयर का एक रूप ले चुका है। जब तक पुलिस और साइबर फॉरेंसिक क्षमता को हाई-टेक अपराधियों से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, तब तक शहर इस तरह के डिजिटल टेरर से जूझता रहेगा।
हाईकोर्ट को लगातार मिल रही धमकियां
जयपुर हाई कोर्ट की जयपुर बेंच परिसर को लगातार तीसरे दिन भी बुधवार को बम धमाके की धमकी मिली। इस सप्ताह की शुरुआत से ही हर दिन हाई कोर्ट बेंच को बम की धमकी के ई-मेल प्राप्त हो रहे हैं।
इस महीने में 5 दिसंबर से लेकर बुधवार तक हाई कोर्ट बेंच को चौथी बार बम की धमकी मिली है, जबकि 31 अक्टूबर को पहली धमकी मिली थी। इन धमकियों के कारण कोर्ट के कामकाज में बाधा आ रही है।
बम की धमकी के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने केसों की सुनवाई करीब एक घंटे के लिए टाल दी थी। इससे केसों की सुनवाई सुबह 11:30 बजे ही शुरू हो सकी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
गुरुवार को हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के होने वाले चुनाव के मद्देनजर प्रशासन से अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर कोर्ट परिसर की गहन जांच की गई और वकीलों व पक्षकारों को परिसर से बाहर भेज दिया गया।
हाई कोर्ट चौकी प्रभारी सुमेर सिंह ने बताया कि बम की सूचना मिलते ही पुलिस के बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने पूरे हाईकोर्ट परिसर के चप्पे-चप्पे की जांच की। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी तैनात की गई थी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा का कहना है कि हाई कोर्ट परिसर में सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं, लेकिन यह एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। रोजाना कौन यहां बम विस्फोट की धमकी दे रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हाई कोर्ट बहुत ही संवेदनशील जगह है और कई अहम मुद्दों की यहां सुनवाई होती है। ऐसी धमकियां न्यायपालिका के कामकाज को बाधित करती हैं और भय का माहौल पैदा करती हैं।
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