जयपुर | उपेक्षित को आरक्षण और आरक्षित को संरक्षण का नारा देने वाले लोकेन्द्र सिंह कालवी का लम्बी बीमारी के बाद सोमवार देर रात जयपुर में निधन हो गया। कालवी सामाजिक न्याय मंच के अगुवा थे, जिसने राजपूत समाज को अन्य जातियों से जोड़ने में भूमिका निभाई।
नहीं रहे राजपूत समाज के नेता कालवी : उपेक्षित को आरक्षण और आरक्षित को संरक्षण का नारा देने वाले लोकेन्द्र सिंह कालवी का निधन
सामाजिक रूप से कालवी की ख्याति गजब की रही, लेकिन लम्बी राजनीति के बावजूद वे कभी सियासत में सफल नहीं हो पाए। कालवी परिवार सियासत से उपर समाज को रखता आया है, ऐसे वे हर बार किसी न किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा छल ही लिए जाते। lokendra singh kalvi passed away
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- सामाजिक रूप से कालवी की ख्याति गजब की रही, लेकिन लम्बी राजनीति के बावजूद वे कभी सियासत में सफल नहीं हो पाए। कालवी परिवार सियासत से उपर समाज को रखता आया है, ऐसे वे हर बार किसी न किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा छल ही लिए जाते।
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श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक रहे कालवी करीब दस माह से पक्षाघात के बाद गंभीर बीमार थे। सामाजिक न्याय की नजर से आरक्षण को देखे जाने के लिए संघर्ष की शुरूआत करने वालों में कालवी का नाम प्रमुखता से आता है।
कालवी ने अपने जीवन में सामाजिक मुद्दों को लेकर लगातार आन्दोलन किए। जोधा अकबर और पद्मावत जैसी फिल्मों में इतिहास से छेड़छाड़ के विरोध में कालवी का आन्दोलन देशभर में चर्चित रहा।
राजस्थान के नागौर जिले के कालवी गांव में जन्मे लोकेन्द्र सिंह कालवी के पिता का नाम कल्याण सिंह कालवी था। वे चन्द्रशेखर के प्रधानमंत्री काल में भारत सरकार में मंत्री रहे। कई बार विधायक और राजस्थान में भी मंत्री पद पर भी रहे। लोकेन्द्र सिंह कालवी की पढ़ाई अजमेर के मेयो कॉलेज से हुई थी। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अच्छी पकड़ रखने वाले लोकेन्द्र सिंह बॉस्केटबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे।
सामाजिक नेता, लेकिन राजनीतिक सफलता नहीं
सामाजिक रूप से कालवी की ख्याति गजब की रही, लेकिन लम्बी राजनीति के बावजूद वे कभी सियासत में सफल नहीं हो पाए। कालवी परिवार सियासत से उपर समाज को रखता आया है, ऐसे वे हर बार किसी न किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा छल ही लिए जाते।
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1993 में भी कालवी ने नागौर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। 1998 के लोक सभा चुनावों में उन्होंने बाड़मेर-जैसलमेर सीट से भाजपा के टिकट पर भाग्य आजमाया। परन्तु जीत नहीं पाए।
आरक्षण का मुद्दा उठाया
राजस्थान में पहली बार किसी संगठन ने यह नारा दिया उपेक्षितों को आरक्षण और आरक्षितों को संरक्षण। यह सामाजिक न्याय मंच था, जिसने न केवल राजपूत बल्कि अन्य सभी वंचित लोगों की आवाज उठाई।
अगुवाई लोकेन्द्रसिंह कालवी ने की। राजपूत समाज से ब्राह्मण, राजपुरोहित, वैश्य वर्ग के साथ गुर्जर, रेबारी जैसे पिछड़े वर्ग भी जुड़े। इसके बाद 2006 में करणी सेना के गठन के बाद इतिहास से जुड़े तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने के मुद्दों पर लगातार सक्रियता नजर आई।
यही नहीं समाज से जुड़े प्रत्येक आन्दोलन में लोकेन्द्र सिंह मुखर रहे। 2017 का आनन्दपाल प्रकरण, सती आन्दोलन, जोधा अकबर, सैफ अली खान को पद्मश्री और पद्मावत मूवी का अवार्ड आदि।
सक्रिय भूमिका निभाता रहा कालवी परिवार
राजस्थान के राजपूत समाज में कालवी परिवार अपने समाज की पैरवी में हमेशा खड़ा रहा है और अपने राजनैतिक जीवन को दूसरे नम्बर पर रखा। राजस्थान के किसी भी हिस्से में राजपूतों से जुड़ा कोई भी आन्दोलन हो।
कालवी परिवार हमेशा सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। लोकेन्द्र सिंह के पिता कल्याण सिंह कालवी को याद करना राजपूत समाज के लोगों को गर्व से भर देता है।
साथ ही समाज पर आने वाले किसी तरह के तात्कालिक संकट के चलते उनके पुत्र लोकेन्द्रसिंह की ओर नजरें उठती रही हैं। लोकेन्द्र सिंह उन नजरों के लिए उम्मीद रहे, लेकिन अब उनके निधन के बाद इस विरासत का क्या होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।
क्या उनके पुत्र प्रताप सिंह अथवा भवानी सिंह कालवी में से कोई एक परिवार की इस लीगेसी को आगे बढ़ाएगा। करणी सेना का क्या होगा, अब करणी सेना किस एजेंडे के तहत काम करेगी? जिसके वे प्रधान संरक्षक रहे।
कई सारे सवाल राजपूत समाज में गूंजने लगे हैं। क्योंकि कालवी के बाद फिलहाल राजपूत समाज में ऐसा कोई राजनैतिक व्यक्ति नजर नहीं आता जो सिर्फ समाज के लिए राजनीतिक कॅरियर की परवाह नहीं करे।
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