दलपतसिंह की यह कहानी पहली बार 2011 में मुकम्मल हुई जो सैकड़ों युवाओं को प्रेरणा दे गई।
अकादमिक और प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत बार असफल रहे दलपतसिंह आज राजस्थान की लेखा शाखा के राज्य स्तरीय अधिकारी हैं।
वे फिलहाल राजस्थान पर्यटन विकास निगम में महाप्रबंधक फाइनेंस के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं।
दलपतसिंह की कहानी एक थिएटर आर्ट वाली मूवी का आभास देती है। इसमें क्षमताओं से बाहर जाकर सपना देखने, सच्चाई, ईमानदार कोशिश और सच्ची मेहनत की दास्तान है।
यह असफलता और सफलता के बीच का एक ऐसा बायोस्कोप है और जो हर किसी के जीवन में हकीकत रूबरू होता है।
शुरूआत में दलपतसिंह सपने देखते हैं। अपने आसपास के बुने—बुनाए माहौल से ग्रामसेवक बनने जैसा।
बाद में वे इंजीनियर बनने का अपने पिता का सपना मन में लेकर साइंस मैथ्स विषय से बारहवीं में एक असफल कोशिश करते हैं।
फिर उस सपने को डायवर्ट करते हैं कंपाउंडर जैसी सेवा के लिए और साइंस बायोलॉजी लेते हैं। बारहवीं में बमुश्किल पास होकर दलपत बीएससी में फेल हो जाते हैं।
साइंस से बेरुख होकर फिर दलपतसिंह अंग्रेजी साहित्य से प्रेम कर बैठते हैं और आर्ट्स से ट्राई करते हैं। लेकिन अंग्रेजी साहित्य उनसे बेरुख ही रहता है और वे फिर फेल हो जाते हैं।
सात साल में कला स्नातक की तीन वर्षीय डिग्री लेकर दलपतसिंह ग्रामसेवक की नौकरी में रम जाते हैं।
ग्रामसेवक में दो बार सस्पेंड भी हो जाते हैं। अचानक वे एक लेख लिखते हैं महाराणा प्रताप और राम के बीच तुलनात्मक समानता का।
लेख पढ़कर उनके मित्र प्रभुदयाल सिंह मगरतलाव उन्हें आईएएस बनने का सपना दिखाते हैं। दलपतसिंह अपना सपना जो कि मनी—मनी नहीं है, परिजनों—मित्रों के सामने रखते हैं। सभी लोग आगे बढ़ने को कहते हैं।
हालांकि इन कहने वालों में मन से कहने वाले कम ही लोग थे। दलपतसिंह बिना तनख्वाह वाली छुट्टी लेकर तैयारी में जुटे, पहले प्रयास में अखिल भारतीय सेवा की मुख्य परीक्षा तक पहुंचते हैं। उनके पास एक ही चांस था और उसमें उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ कर दिया था।
मित्र प्रभुदयालसिंह, राजेन्द्रसिंह डिंगाई आदि का साथ आगे बना रहा तो आरएएस में आते हैं। कई साल तक मेहनत करने के बाद वे 2010 में 55वीं रैंक पर चयनित होते हैं। उन्हें लेखा सेवा मिली और उसी पर वे अपने राह को बुलंद किए हुए हैं।
दलपतसिंह प्रेरणास्रोत हैं, हजारों ऐसे युवाओं के जिनकी छोटी आंखें बड़े सपने देखती हैं। जो यह ख्वाब देखते हैं कि चांद तक जाने वाली सड़क पर उनके प्लॉट की रजिस्ट्री भी हो ही जाएगी।
यदि आप इस ख्वाब, उसके बाद के सफर और सफलता की चाशनी से खुद को तारी करना चाहते हैं तो पूरा वीडियो देखें।