Jaipur: सनातन सभ्यता, संस्कृति में किन्नरों का स्थान देव,यक्ष, किन्नर इस तरह से आता है, बाकि सब बाद में। इस समाज का स्थान बहुत ऊँचा माना जाता रहा है। लेकिन आजादी के बाद इस समाज की स्थिति दयनीय होती गई। ना तो समाज ने इन्हें अपनाया ना ही सरकार ने।
हमारी बात किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर पुष्पामाई से हुई उन्होंने समाज और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुष्पा माई का कहना है कि किन्नर समाज वो समाज है जिसने प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण को अपनी गोद में खिलाया है। यही नहीं किसी के भी घर बच्चा पैदा होने पर सबसे पहले बलैया लेने किन्नर समाज जाता है।
पुष्पामाई ने कहा कि महारानी पद्मावती के जौहर में भी 500 किन्नरों ने अपना योगदान दिया था, लेकिन यह बात कोई याद नहीं रखता और पाठ्यक्रम में भी इसका जिक्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमारे समाज को सभ्य कहे जाने वाले समाज ने ही भीख मांगने, सेक्स वर्कर जैसे कामों के लिए मजबूर किया है। समाज हमें हीन दृष्टि से देखता है, और सरकार की तरफ से जॉब के हमें पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। किन्नर समाज को डॉक्यूमेंट्स बनवाने में भी एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।