जयपुर | विधानसभा चुनाव 2023 (Assembly Election 2023) के रंग में रंग चुके राजस्थान में अब छात्रसंघ चुनावों (Student Union Elections 2023) पर खतरा मंडरा गया है।
नहीं दिख रही सरकार की मंशा: छात्रसंघ चुनाव पर भारी पड़ रहे विधानसभा चुनाव, तो क्या इस साल नहीं होंगे
राजस्थान में इस साल नवंबर या दिसंबर में विधान सभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार को आशंका है कि छात्रसंघ चुनाव के परिणाम कहीं आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम को प्रभावित नहीं कर दे।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान में इस साल नवंबर या दिसंबर में विधान सभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार को आशंका है कि छात्रसंघ चुनाव के परिणाम कहीं आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम को प्रभावित नहीं कर दे।
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राज्य की गहलोत सरकार इस साल राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने के मुड में दिख रही है।
दरअसल, राजस्थान में इस साल नवंबर या दिसंबर में विधान सभा चुनाव होने जा रहे हैं।
ऐसे में राज्य सरकार को आशंका है कि छात्रसंघ चुनाव के परिणाम कहीं आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम को प्रभावित नहीं कर दे।
जिसके चलते गहलोत सरकार का मानस छात्रसंघ चुनाव को नहीं कराने का बना हुआ है।
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देखने लायक बात ये भी है कि इस बार अगस्त का पहला सप्ताह निकल चुका है लेकिन राजस्थान यूनिवर्सिटी में अभी तक कोई खास चुनावी माहौल नहीं देखा गया है।
फिलहाल छात्रसंघ चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
गौरतलब है कि हाल ही में छात्रसंघ चुनाव करवाने को लेकर सरकार ने प्रदेश के सभी कुलपतियों से एक रिपोर्ट मांगी थी, उसके दिए गए फीडबैक के बाद अब ये बात भी सामने आ रही है कि इस बार सरकार छात्रसंघ चुनाव करवाने के पक्ष में नहीं है।
मीडिया में चल रही खबरों की माने तो उस रिपोर्ट छात्र नेताओं द्वारा लिंग दोह कमेटी का उल्लंघन करने और बार-बार धरने-प्रदर्शन के कारण शैक्षणिक माहौल खराब होना सामने आया था। साथ ही छात्रों द्वारा कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने की बात भी की गई थी।
हालांकि अभी इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अभी तक की स्थिति तो यही बयां करती दिख रही है।
2005 से लेकर 2009 तक नहीं हुए थे छात्रसंघ चुनाव
आपको बता दें कि, 2005 से लेकर 2009 तक ऐसा मौका भी आया था जब छात्रसंघ चुनाव पर पूरी तहर से पाबंदी रही थी और कही भी चुनाव नहीं हो पाए थे।
इस दौरान प्रदेश की सरकार को हर साल छात्रसंघ चुनाव करवाने के लिए छात्रों का विरोध झेलना पड़ा था।
ऐसे में गहलोत सरकार ने 2010 में एक बार फिर से छात्रसंघ चुनाव को हरी झंडी दे दी थी।
खैर! अब जो कुछ भी हो, आखिरी फैसला तो राज्य सरकार को ही करना है। छात्रों को सरकार के जवाब का इंतजार है।
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