राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार द्वारा नए जिलों की घोषणा के बाद राजस्थान के दूसरे हिस्सों में भी अब जिला बनाने की मांग तेज हो चुकी है. गहलोत सरकार इस फैसले को भुना पाती उससे पहले ही दूसरे जिलों की मांग उठी बल्कि अब वह मांग लगातार बढ़ती जा रही है.
बांदीकुई को जिला बनाने की मांग तेज : थम नहीं रही है बांदीकुई को जिला बनाने की मांग, अनशन जारी और नागरिक मांग पर डटे
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार द्वारा नए जिलों की घोषणा के बाद राजस्थान के दूसरे हिस्सों में भी अब जिला बनाने की मांग तेज हो चुकी है. गहलोत सरकार इस फैसले को भुना पाती उससे पहले ही दूसरे जिलों की मांग उठी बल्कि अब वह मांग लगातार बढ़ती जा रही है.
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ऐसी ही एक मांग बांदीकुई को जिला बनाने के लिए चल रही है. और इसके लिए अब बात इतनी आगे बढ़ चुकी है कि बांदीकुई के नागरिकों का लगातार 19 वे दिन भी धरना जारी है.

अनशनकारी की हालत गंभीर
इस धरने में आमरण अनशन पर बैठे सुरेश आसीवाल की तबियत अब इतनी बिगड़ चुकी है कि वह हॉस्पिटल में भर्ती है और सरकार सहित प्रशासन के द्वारा ना तो अनशनकारी का अनशन तुड़वाया गया है और न ही उनकी मांग पर अभी तक कोई विचार किया है.
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बांदीकुई के स्थानीय विधायक गजराज खटाना ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर नागरिको से बात की है और बांदीकुई को जिला बनाने के लिए आन्दोलन करने वाले लोगो का एक प्रतिनिधिमंडल रामलुभाया कमिटी से मिलकर अपना पक्ष भी रख चुका है.
लेकिन अभी तक ना तो धरना समाप्त हो पाया और ना ही आमरण अनशन पर बैठे सुरेश आसीवाल ने अपना अनशन तोडा है.
बांदीकुई के नागरिकों का पक्ष
बांदीकुई को जिला बनाने की मांग को लेकर अड़े इन लोगो का पक्ष है कि बांदीकुई एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर है. ब्रिटिश काल में बांदीकुई राजस्थान के ना केवल सबसे प्रमुख नगरों में से एक था बल्कि अंग्रेजो की आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र था.
बांदीकुई के आर्थिक और भौगोलिक महत्त्व को ध्यान में रखकर ब्रिटिशकाल के दौरान राजस्थान की पहली रेल भी यही चली थी. लेकिन बीते सत्तर साल से जिला ना बनने के कारण बांदीकुई विकास की गति में बहुत पिछड़ गया है.
चाँद बावड़ी विश्वभर में प्रसिद्द
बांदीकुई का ना केवल ऐतिहासिक महत्व है बल्कि पर्यटन में भी यह शहर विश्वस्तर पर अपनी खास पहचान रखता है. विश्वप्रसिद्द आभानेरी की चाँद बावड़ी देखने आज भी दुनिया के हर कोने पर्यटक बांदीकुई आते है.
इसके अलावा दिल्ली-आगरा रेलमार्ग पर स्थित होने के कारण रेल कनेक्टिविटी में भी बांदीकुई एक बड़ा जंक्शन है. इन सब बातों के आधार पर बांदीकुई के नागरिक लगातार 19 दिन से धरना दे रहे है.

धरना देने वालों में बांदीकुई के नागरिक सोहन सिंह करीरिया, रवि पालीवाल, सीताराम गुर्जर, महावीर रलावता, श्यामसुंदर अग्रवाल, त्रिलोक शर्मा, गोकुल गुरूजी ने बातचीत में बताया कि यह आंदोलन पूरे बांदीकुईवासियों के लिए एक हक़ का संघर्ष है. और किसी भी दलगत राजनीति से दूर हटकर बांदीकुई जिला बनाओ संघर्ष समिति के द्वारा सभी को साथ लेकर यह आंदोलन चलाया जा रहा है.

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