जालोर | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डॉ. भीमराव अंबेडकर पर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के विरोध में दलित संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस प्रदर्शन का नेतृत्व अजाक, आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन, अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी, अंबेडकर सेवा समिति, राष्ट्रीय मूल निवासी संगठन, और बामसेफ ने संयुक्त रूप से किया।
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा: गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर दलित संगठनों का विरोध
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डॉ. भीमराव अंबेडकर पर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के विरोध में दलित संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस
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क्या है मामला?
संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा, "यह फैशन हो गया है, अंबेडकर, अंबेडकर... इतना नाम अगर भगवान का लेते हैं तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता है।" इस बयान को लेकर देशभर में नाराजगी है, और इसे संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर का अपमान माना जा रहा है।
संविधान और कानून के उल्लंघन का आरोप
ज्ञापन में गृह मंत्री के बयान को भारतीय संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 51ए (ई), अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 3(i) (फ), और भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 295ए का उल्लंघन बताया गया है।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेता
इस विरोध प्रदर्शन में दलाभाई राव, कानाराम परमार, छगनलाल मीना, खसाराम एडवोकेट, रूपेश कुमार एडवोकेट, अन्नाराम डाबी, तरुण कुमार, मोहनलाल, और विनोद कुमार सहित कई नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
क्या बोले संगठन के प्रतिनिधि?
संगठनों का कहना है कि डॉ. अंबेडकर का सम्मान केवल दलित समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे देश का दायित्व है। संसद में ऐसे बयान समाज में विभाजन और असंतोष को बढ़ावा देते हैं।
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आगे की रणनीति
संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे देशव्यापी आंदोलन करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से इस मुद्दे पर त्वरित और सख्त कार्रवाई की अपील की है।
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