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राजस्थान

आठ जुलाई को : PM Narendra Modi का सियासी मायनों में ख़ास है बीकानेर दौरा, ऐसे समझिए समीकरणों को क्यों जरुरी है BJP के लिए बीकानेर

लोकेन्द्र किलाणौत लोकेन्द्र किलाणौत

नरेन्द्र मोदी आने वाली आठ जुलाई को बीकानेर आने वाले है। इसके लिए राजस्थान भाजपा लगातार तैयारियों में जुटा है और भाजपा का टारगेट दो लाख की भीड़ जुटाने का है। नेता-प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ लगातार मोदी की बीकानेर में होने वाली सभा की तैयारियों की अपडेट ले रहे है।

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बीकानेर | नरेन्द्र मोदी आने वाली आठ जुलाई को बीकानेर आने वाले हैं। इसके लिए राजस्थान भाजपा लगातार तैयारियों में जुटी है और भाजपा का टारगेट दो लाख की भीड़ जुटाने का है। नेता-प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ लगातार मोदी की बीकानेर में होने वाली सभा की तैयारियों की अपडेट ले रहे हैं ।  

कहने को तो प्रधानमंत्री पच्चीस हजार करोड़ की लागत से बने प्रोजेक्ट का लोकार्पण करने के लिए बीकानेर आ रहे हैं लेकिन सियासी लिहाज से नरेन्द्र मोदी का बीकानेर आना बहुत ख़ास माना जा रहा है।  

बीते दिनों भी नरेन्द्र मोदी कि उदयपुर,जोधपुर और अजमेर संभाग में बड़ी जनसभा हो चुकी है। ऐसे में चुनावों से पहले बीकानेर संभाग को सियासी लिहाज से साधना भाजपा के लिए जरुरी हो गया है।  

अगर आंकड़ों के हिसाब से देखें तो बीकानेर संभाग में कुल 24 विधानसभा सीटें हैं। फिलहाल इनमे से ग्यारह सीटों पर कांग्रेस और दस पर भाजपा काबिज है। वहीं दो सीट CPM और एक सीट पर निर्दलीय विधायक है।  

इसलिए नरेन्द्र मोदी की इस जनसभा के बहाने भाजपा का उद्देश्य बीकानेर संभाग की सभी विधानसभा सीटों को साधना है।क्योंकि सरकार रिपीट के दावे के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पूरा फोकस बीकनेर पर है,साथ ही वर्तमान के सियासी हालातों को भी देखा जाए तो बीकानेर में कांग्रेस की स्थिति को काफी मजबूत माना जा सकता है।  

कारण की बीते दिनों राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी द्वारा आयोजित किसान सम्मलेन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित PCC चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा और प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा पहुंचे थे।  

इसके अलावा बीकानेर में भाजपा के पास फिलहाल कोई मजबूत क्षत्रप नहीं है, इसके उलट कांग्रेस के पास दिग्गज नेताओं की भरमार है। पूर्व नेता-प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी चुनाव आते ही कांग्रेस के लिए मजबूत कैम्पेनिंग में जुट गए है। इसके अलावा गहलोत सरकार में बीकानेर जिले से मंत्रियों की भी भरमार है।  

बीड़ी कल्ला, भंवर सिंह भाटी सहित गोविन्दराम मेघवाल बीकानेर जिले से ना केवल मंत्री हैं बल्कि सीनियर नेता भी हैं। जबकि भाजपा में देवी सिंह भाटी और केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की आपसी अदावत लगातार परवान चढ़ती जा रही है। देवी सिंह भाटी फिलहाल भाजपा के बागी है और अर्जुनराम मेघवाल से उनकी अदावत का भाजपा को जमीन पर नुकसान उठाना पड़  रहा है।  

हालाँकि भाजपा के पास फिलहाल अर्जुनराम मेघवाल एक बड़ा फेस है लेकिन धरातल पर उन्हें इतना असरदार नहीं माना जा सकता कि विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए एकतरफा नैरेटिव बना सकें।  

इसके जवाब में कांग्रेस के पास रामेश्वर डूडी जाट समाज से, बीड़ी कल्ला ब्राह्मण समाज से, गोविंदराम मेघवाल बतौर दलित फेस और भंवर सिंह भाटी राजपूत फेस के तौर पर एक अच्छा कॉम्बिनेशन है।  

इन सब बातों के मद्देनजर बीकानेर भाजपा के समाने बड़ा चेलेंज खड़ा कर सकता है।इसलिए ना केवल बीकानेर जिला बल्कि पूरे संभाग के समीकरणों को साधने के लिए आठ जुलाई को नरेन्द्र मोदी खुद आ रहे हैं।  

गंगानगर-हनुमानगढ़ पर भी रहेगा फोकस 

ना केवल बीकानेर बल्कि नरेन्द्र मोदी की इस बड़ी जनसभा के बहाने बीकनेर संभाग के ही दो जिले गंगानगर - हनुमानगढ़ पर सबसे ज्यादा फोकस है। क्योंकि जिस तरह से आम आदमी पार्टी [AAP] राजस्थान में आक्रामक कैम्पेनिंग कर रही है, साथ ही राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी [RLP]  के मुखिया हनुमान बेनीवाल लगातार इस इलाके के मुद्दों पर सक्रिय हैं,जो भाजपा के लिए गौर करने लायक बात है।  

क्या देवी सिंह भाटी पर हो पाएगा कोई फैसला 

बीकानेर की राजनीति को बड़े स्तर पर प्रभावित करने वाले भाजपा के बागी देवी सिंह भाटी को लेकर अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है। देवी सिंह भाटी ना केवल इस बार के चुनावों को लेकर पहले से ही सक्रिय हो गए हैं बल्कि जिस स्टाइल की पॉलिटिक्स के लिए वे जाने जाते हैं उसी तरह की बयानबाजी उनकी तरफ से देखने को मिल रही है।  

राजस्थान भाजपा में अभी भी देवी सिंह भाटी की पार्टी में वापसी का एक बड़ा मुद्दा अनसुलझा है। बताया जाता है कि केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से उनकी खुली अदावत इसमें बड़ा रोड़ा बनी हुई है। लेकिन देवी सिंह भाटी फिलहाल वसुंधरा राजे के खेमे में मुखर हैं और बीते दिनों उनके नेतृत्व में वसुंधरा राजे भी बीकानेर पहुंची जहां देवी सिंह भाटी ने उनके लिए बड़ी भीड़ जुटाई थी।  

ऐसे में देवी सिंह भाटी को लेकर फिलहाल यही असमंजस है कि वसुंधरा राजे की भूमिका पर उनकी स्थिति तय हो पाएगी। 

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