बहते शब्द
नीलू की कविता: नव वर्ष शुभ हो
तुम्हारा वर्तमान होना प्रसव पीड़ा और आज अतीत हो जाना उंगलियों से उर्मियों के फिसल जाने सदृश अन्तिम दिवस अपनी देहरी स...
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