जयपुर | राजस्थान का एक और लाल जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में शहीद होकर हमेशा के लिए अमर हो गया है।
राजस्थान का लाल शहीद: पार्थिव देह को आज पहुंचेगी गांव, अब तक पत्नी और बच्चों को नहीं खबर
38 साल के बाबूलाल शाहपुरा के समीप हनुतपुरा गांव की डूंगरी वाली ढाणी के निवासी थे। बाबूलाल के शहीद होने की सूचना सेना की ओर से शनिवार सुबह उनके बड़े भाई को दी गई।
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- 38 साल के बाबूलाल शाहपुरा के समीप हनुतपुरा गांव की डूंगरी वाली ढाणी के निवासी थे। बाबूलाल के शहीद होने की सूचना सेना की ओर से शनिवार सुबह उनके बड़े भाई को दी गई।
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राजधानी जयपुर के शाहपुरा के रहने वाले बाबूलाल जाट शुक्रवार को आतंकियों के हमले में शहीद हो गए। वे एक हफ्ते पहले ही ड्यूटी पर गए थे।
38 साल के बाबूलाल शाहपुरा के समीप हनुतपुरा गांव की डूंगरी वाली ढाणी के निवासी थे।
बाबूलाल के शहीद होने की सूचना सेना की ओर से शनिवार सुबह उनके बड़े भाई को दी गई।
हालांकि, इस बारे में वीरांगना और उनके बेटों को इसकी खबर नहीं दी है। आज शहीद की पार्थिव देह उनके गांव आ रही है।
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शहीद के परिवार में बुजुर्ग पिता लालाराम जाट, पत्नी कमलेश और दो बच्चे हैं। मां का एक साल पहले निधन हो चुका है। बेटा विशाल सीकर में ’नीट’ की तैयारी कर रहा है।
छोटा बेटा विशेष जयपुर के बगरू में 11वीं क्लास में साइंस का फाउंडेशन कोर्स कर रहा है।
आर्मी कैंप पर आतंकियों ने किया था हमला
जानकारी के मुताबिक, कुलगाम में आतंकियो ने सेना के कैंप पर हमला बोला था। इसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें 3 जवान घायल हो गए।
जिसमें बाबूलाल भी शामिल थे। तीनों को गंभीर हालत में श्रीनगर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान देर रात राजस्थान के सपूत बाबूलाल की मौत हो गई।
पिता की आंखों के ऑपरेशन के लिए छुट्टी लेकर आए थे
परिवार के लोगों ने बताया कि बाबूलाल अपने पिता गुलाराम की आंखों का ऑपरेशन कराने के लिए जुलाई में एक माह की छुट्टी लेकर आए थे।
पिता की आंखों का ऑरेशन कराने के बाद 29 जुलाई को ही ड्यूटी पर लौट गए थे।
मातृभूमि की रक्षा करते हुए जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सर्वोच्च बलिदान देने वाले राजस्थान के वीर सपूत श्री बाबूलाल जी जाट की शहादत को नमन करता हूं।
ईश्वर शोक संतप्त परिजनों को इस पीड़ा को सहन करने का संबल प्रदान करें, परिजनों के प्रति मेरी गहन संवेदनाएँ।
ॐ शांति! pic.twitter.com/3AAKEKzhYm
3 साल पहले हुआ था प्रमोशन
शहीद जवान के बड़े भाई भैरुलाल का कहना है जैसे ही उनके लाड़के भाई के शहीद होने की खबर आई तो उनके होश उड़ गए। उनके लिए ये बड़ी मुश्किल की घड़ी थी।
शहीद बाबूलाल का साल 2005 में हवलदार के पद पर सेना की 8 जाट रेजिमेंट में सलेक्शन हुआ था।
इसके बाद 3 साल पहले ही उनका प्रमोशन हेड कॉन्स्टेबल के पद पर हुआ था।
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